
जापान-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास पर भड़का चीन, एशिया-प्रशांत में बढ़ी टकराव की हलचल
बीजिंग -15 सितंबर। चीन ने जापान,अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास और जापान में लंबी दूरी के रणनीतिक हथियारों की तैनाती का कड़ा विरोध किया है। चीन ने चेतावनी दी है कि इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ और सैन्य टकराव का खतरा बढ़ सकता है।
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू और चीन के अंग्रेजी दैनिक ‘चाइना डेली’ के मुताबिक, चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने सोमवार को कहा कि जापान की ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के साथ ‘ओरिएंट शील्ड 26’ अभ्यास कर रही है। यह अभ्यास 8 से 24 सितंबर तक होक्काइडो और कागोशिमा क्षेत्रों में चल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अभ्यास में पहली बार अमेरिका का टाइफॉन मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम भी शामिल किया जा रहा है। चीन का कहना है कि इस तरह की तैनाती से क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ रही हैं।
जियांग बिन ने आरोप लगाया कि सुरक्षा कवच के नाम पर इस अभ्यास का इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलावर हथियारों की तैनाती को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इससे दूसरे देशों के वैध सुरक्षा हित प्रभावित होते हैं और क्षेत्रीय शांति को गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा, “हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।”
रूस ने भी जताई आपत्ति—
इस अभ्यास को लेकर रूस ने भी आपत्ति जताई है। 31 अगस्त को रूस ने जापानी दूतावास के सामने विरोध दर्ज कराया था। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने 1 सितंबर को कहा था कि जापानी क्षेत्र में ऐसे हथियारों की तैनाती रूस की सुरक्षा के लिए खतरा है और यह मॉस्को के लिए “बिल्कुल अस्वीकार्य” है।
चीन का आरोप-जापान बढ़ा रहा सैन्य महत्वाकांक्षा—
जियांग बिन ने कहा कि जापान लंबे समय से लंबी दूरी के हमलावर हथियार विकसित कर रहा है और विदेशों में सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है, जो उसके शांतिवादी संविधान के विपरीत है। उन्होंने इसे मिलिट्रीवाद के नए रूप की ओर बढ़ता कदम बताया।
उन्होंने चेतावनी दी, “जापान की सैन्य महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने वाला कोई भी कदम क्षेत्र को एक खतरनाक भंवर में धकेल सकता है और अंततः खुद जापान को ही नुकसान पहुंचाएगा।”



