
बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 को मंजूरी, 30 जून को गजट में प्रकाशित
पटना- 14 सितंबर। बिहार सरकार ने बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। गन्ना उद्योग विभाग की यह नीति 30 जून 2026 के असाधारण गजट (सं. 691) में प्रकाशित हो गई है। राज्य मंत्रिपरिषद ने 24 जून 2026 को मद सं. 39 में इसे स्वीकृति दी थी। यह नीति अधिसूचना की तिथि से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी, और SIPB से अनुमोदित मामलों के लिए 31 मार्च 2029 तक मान्य होगी।
सरकार का लक्ष्य बंद पड़ी चीनी मिलों को चरणबद्ध रूप से चालू करना, नई चीनी मिलों की स्थापना और गन्ना आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार बढ़ाना है। 2005 में राज्य में चीनी मिलों की कुल पेराई क्षमता 33,500 TCD थी जो प्रोत्साहन नीति 2006 और 2014 के बाद बढ़कर 65,450 TCD हो गई है।
नई चीनी मिल स्थापना, क्षमता विस्तार पर न्यूनतम 3500 TCD क्षमता की नई मिल लगाने पर 70 करोड़ रुपये (5 साल में 5 समान किस्तों में), 3500 TCD से ऊपर प्रत्येक 100 TCD पर 2 करोड़ अतिरिक्त। कार्यरत मिलों में न्यूनतम 1000 TCD विस्तार पर 15 करोड़, 1000 से ऊपर प्रति 100 TCD पर 1.5 करोड़ अतिरिक्त।
अतिरिक्त उत्पादित चीनी पर भूमि खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी और निबंधन शुल्क की 100% प्रतिपूर्ति। 5000 TCD मिल के लिए 40 एकड़ तक जमीन 1 रुपये टोकन पर 30 साल लीज पर, 3500 TCD के लिए 25 एकड़ तक। चीनी मिल के साथ न्यूनतम 45 KLPD नई इथेनॉल इकाई या 15 KLPD विस्तार पर-प्लांट-मशीनरी पर 15% या अधिकतम 5 करोड़ पूंजी अनुदान, 10% ब्याज अनुदान (अधिकतम 20 करोड़), 5 साल SGST प्रतिपूर्ति।
न्यूनतम 10 MW नई इकाई या 5 MW विस्तार पर 20% या अधिकतम 15 करोड़ तक अनुदान, साथ में पावर परचेज एग्रीमेंट की सुविधा। न्यूनतम 5 TPD क्षमता पर 15% या अधिकतम 5 करोड़, ब्याज अनुदान 10% (अधिकतम 10 करोड़) और SGST प्रतिपूर्ति।
निवेशक को RBI/SEBI मान्यता प्राप्त बैंक से DPR और मूल्यांकन रिपोर्ट देना होगा। प्रोजेक्ट को अनुमोदन की तिथि से 36 महीने में पूरा करना होगा। कुल ब्याज अनुदान और पूंजी अनुदान मिलाकर प्रोजेक्ट लागत का 33% से अधिक नहीं होगा।



