
MADHUBANI:- नगर निगम वार्ड 3 में नल जल योजना में अनियमितता, जलमीनार कब्जाने का आरोप, DM से उच्चस्तरीय जांच की मांग
मधुबनी- 11 सितंबर। मधुबनी नगर निगम के वार्ड 3 में नल का जल योजना में भारी अनियमितता और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग हो रहा है। इसको लेकर आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (कार्यक्रम प्रकोष्ठ) सह मिथलांचल संघर्ष समिति के अध्यक्ष इं. गौरीशंकर यादव ने जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब वार्ड 3 पंचायती राज के अधीन था, तब नल-जल योजना के तहत पानी की टंकी और फाउंडेशन का निर्माण कराया गया था। निर्माण के समय जमीन मालिक से कोई वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं लिया गया और न ही कोई प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसका फायदा उठाकर जिस जमीन पर जलमीनार बनी है, उसके मालिक ने जलमीनार पर कब्जा कर लिया है।
जलमीनार पर कब्जा जमाए व्यक्ति द्वारा नल-जल की सरकारी मोटर चलाकर हजारों लीटर पेयजल को कृषि कार्य और खेतों की सिंचाई में बर्बाद किया जा रहा है, जबकि वार्ड के आम लोगों को पीने के पानी के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। यह सरकारी संसाधन का सीधा दुरुपयोग और लापरवाही है। उन्होंने जिलाधिकारी से जलमीनार निर्माण और जमीन संबंधी दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जलमीनार और सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। पेयजल का कृषि में दुरुपयोग तुरंत बंद कराया जाए। इस अनियमितता में शामिल दोषी अधिकारियों और कब्जाधारी पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिला प्रशासन के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व में वार्ड 3 में केवल 1 जलमीनार का निर्माण किया गया था। साल 2022 में नगर निगम में शामिल हुआ। नगर निगम में शामिल होने से पहले इसकी देखरेख रहिका प्रखंड को करनी थी, लेकिन नगर निगम का गठन होने के बाद इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की है। वार्ड में पिछले दो साल से भारी जलसंकट को देखते हुए नगर निगम द्वारा दो सबमर्सिबल उपलब्ध कराए गए।
हालांकि इन दो सबमर्सिबल से भी 2500 की बड़ी आबादी को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने बताया कि निगम क्षेत्र के वार्ड 39 के कैटोला गहबर में स्थित जलमीनार से पिछले लगभग 4 साल से जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। जलमीनार से जुड़े करीब 150 घरों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलमीनार से घरों तक जाने वाली पाइपलाइन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
निगम के वार्ड संख्या 28 में करीब 8 साल पहले लाखों रुपये की लागत से यहां एक जलमीनार का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण के 8 साल बीत जाने के बाद भी जलमीनार से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। निगम के वार्ड 45 में जल संकट बना है। नगर निगम बनने के बाद अब तक इस वार्ड में एक भी नए जलमीनार का निर्माण नहीं हो सका है। निगम बनने से पहले यहां दो जलमीनारों का निर्माण कराया गया था, फिलहाल दोनों से नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। नया जलमीनार नहीं बनने और पाइपलाइन का विस्तार नहीं होने से वार्ड के करीब 350 घरों तक पानी का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।



