
बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, न की मदरसों की बार-बार जांच और कमेटी विवादों में उलझाकर परेशान करना: बलियाबी
पटना- 04 सितंबर। बिहार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मौलाना गुलाम रसूल बलियाबी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए, न कि अनुदानित गैर अनुदानित मदरसों को बार-बार जांच और कमेटी विवादों में उलझाकर परेशान करना।
बिहार के विकास पुरुष पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दूरदर्शी सोच के साथ मदरसों को अनुदानित कर उर्दू और दीनी तालीम को बढ़ावा देने का ऐतिहासिक कार्य किया। लेकिन अफसोस की बात है कि बोर्ड के कुछ जिम्मेदार लोगों की कार्यशैली ने अनेक मदरसों में कमेटी के विवाद खड़े कर दिए, जिससे गांव-गांव में फितना और आपसी तनाव पैदा हो रहा हैl
कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी दो-दो महीना मदरसा बोर्ड से अप्रूवल नहीं देने का क्या मतलब है। क्यो नहीं माना जाय कि जांच के नाम पर पदाधिकारियों को और अप्रूवल के नाम पर बोर्ड को जब तक जकात नहीं जाता तबतक मदरसा का कमेटी का काम नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि एक ही कमेटी की जांच प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी से दो-दो, तीन-तीन बार क्यों कराई जाती है? यदि एक बार विधिवत जांच हो चुकी है, तो बार-बार उसी मामले को खोलने का औचित्य क्या है? क्या बिहार विद्यालय परीक्षा समिति या संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अधीन संस्थानों में भी इसी प्रकार लगातार जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है? यदि नहीं, तो मदरसों के साथ अलग व्यवहार क्यों?



