
04 सितंबर को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, कान्हा की बाल लीलाओं में छुपा है जीवन का सार: महिमा कुमारी
मधुबनी- 02 सितंबर। इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 4 सितंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा में आधी रात को कंस के कारागार में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। जन्माष्टमी को लेकर मधुबनी सहित पूरे मिथिला में मंदिरों में तैयारी तेज है। भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन लीलाओं से भरा है, लेकिन उनकी बाल लीलाएं सबसे अधिक मनोहारी हैं।
श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव के महत्व पर चर्चा करते हुए वास्तु आचार्य व हस्तरेखा विशेषज्ञ महिमा कुमारी ने कहा कि कंस ने बालक कृष्ण को मारने के लिए राक्षसी पूतना को भेजा, जो स्तन में विष लगाकर आई थी। नन्हे कान्हा ने दूध के साथ उसके प्राण ही पी लिए। संदेश था कि भगवान भक्त के सामने छल नहीं चलता। यशोदा के घर माखन की कमी नहीं थी, फिर भी कान्हा टोली बनाकर गोपियों के घर माखन चुराते थे। गोपियां शिकायत करतीं, पर मन ही मन खुश होतीं। संदेश था कि भगवान को अहंकार नहीं, प्रेम चाहिए।
कालिया नाग दमन यानी यमुना को विषमुक्त करना—
महिमा कुमारी ने बताया कि जब कालिया नाग ने यमुना के जल को विषैला कर दिया, तो 5 वर्ष के कान्हा ने यमुना में कूदकर उसके फनों पर नृत्य किया और उसे यमुना छोड़ने पर विवश किया। संदेश था कि छोटी उम्र में भी बड़े अन्याय का विरोध संभव है। इंद्र के घमंड को तोड़ने और ब्रजवासियों को बचाने के लिए 7 दिन तक 7 साल के कान्हा ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। संदेश था कि प्रकृति ही ईश्वर है, उसकी रक्षा ही सच्ची पूजा है। एक दिन यशोदा ने मिट्टी खाने पर कान्हा का मुंह खुलवाया, तो उसमें पूरा ब्रह्मांड, सारे लोक दिख गए। संदेश था कि इस छोटे से बालक में ही सारा संसार समाया है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी की रात बाल गोपाल को झूले में झुलाने और उनकी इन लीलाओं के श्रवण मात्र से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।



