भारत

PM मोदी के नेतृत्व में भारत संकट प्रबंधन का वैश्विक मॉडल बनकर उभरा, जिसका विश्वभर में हो रहा शोध : अमित शाह

नई दिल्ली- 11 जून। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक साधारण परिवार से निकलकर 25 वर्षों तक लगातार जनता का विश्वास प्राप्त करना भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत का प्रमाण है।

उनके नेतृत्व में भारत आज संकट प्रबंधन का वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है, जिसका विश्वभर में शोध हो रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज राजग 80 प्रतिशत भूभाग और 76 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हुए सुशासन और विकास की राजनीति को आगे बढ़ा रहा है।

भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक में अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का स्थिरता, निरंतरता और निर्णायक नेतृत्व भारतीय इतिहास का स्वर्णिम कालखंड है।

दशकों पुरानी नक्सलवाद, आतंकवाद और धारा 370 आदि की समस्या को 12 वर्षों में समाप्त किया।

उन्होंने गुरु नानक देव जी के “सत्ता को सेवा” और समर्थ रामदास जी के निष्काम कर्मयोगी के संदेश को “प्रधानसेवक” बनकर चरितार्थ किया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह कालखंड मजबूत रीढ़ वाली विदेश नीति को स्थापित करने वाले कालखंड के रूप में जाना जाएगा। साथ ही नरेन्द्र मोदी का यह कालखंड देश के सम्मान के साथ कोई समझौता न करने वाली रक्षा नीति के निर्माण के रूप में भी जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना का वैश्विक संकट आया, उस वक्त मोदी जी ने सामूहिक नेतृत्व का परिचय देते हुए न केवल केंद्र सरकार और उसके सभी विभागों को, बल्कि सभी राज्य सरकारों तथा 140 करोड़ देशवासियों को साथ लेकर इतने बड़े संकट से देश को बाहर निकालने का कार्य किया। मोदी जी के नेतृत्व में भारत उन देशों में शामिल हुआ, जिन्होंने सबसे पहले वैक्सीन विकसित की। भारत की कोरोना के विरुद्ध लड़ाई को मॉडल क्राइसिस मैनेजमेंट के रूप में देखा जाने लगा।

उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2014 में वह प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर माथा टेककर लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत के इस भवन को सेवा के मंदिर के रूप में परिभाषित किया और लंबे समय बाद दुनिया को हमारे संविधान की भावना से परिचित कराया। प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से स्वयं को प्रधानमंत्री के बजाय ‘प्रधान सेवक’ के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस कल्पना को चरितार्थ करते हुए सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव को आगे बढ़ाया। भ्रष्टाचार, पॉलिसी पैरालिसिस, कमजोर निर्णय क्षमता वाला नेतृत्व और कमजोर आर्थिक तंत्र जैसी परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में उन्होंने सत्ता संभाली थी। आज ये सभी बातें युवा पीढ़ी के लिए इतिहास बन चुकी हैं। देश में अत्यंत दूरदर्शिता के साथ नीतियां बनाने वाला तंत्र विकसित हुआ है।

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