
दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में नई रोशनी लाने के लिए नेत्रदान ‘महादान’ : डा.भीके रमण
मधुबनी- 10 जून। विश्व नेत्रदान दिवस पर शहर के किशोरी लाल चौक स्थित मिथिला जांच घर में दधीचि देहदान समिति के तत्वावधान में परिचर्चा आयोजित किया गया। परिचर्चा को संबोधित करते हुए समिति के सचिव डा.भीके रमण ने कहा कि भारतीय संस्कृति और चिकित्सा जगत में नेत्रदान को ‘महादान’ माना गया है। नेत्रदान केवल आंखों के कॉर्निया (पारदर्शी परत) तक सीमित होता है। देहदान से एक साथ कई लोगों की जान बचाई जा सकती है और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलता है। लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।कॉर्निया की बीमारी या चोट के कारण दृष्टिबाधित हुए लाखों लोगों के जीवन में नई रोशनी लाना है।मृत्यु के बाद केवल आंखों की कॉर्निया (पारदर्शी पुतली) का ही उपयोग किया जाता है। कॉर्निया प्रत्यारोपण के जरिए नेत्रहीन व्यक्ति को दुनिया देखने का मौका मिलता है। कोई भी नागरिक नेत्रदान कर सकते है। मृत्यु के बाद 6 घंटे के भीतर नजदीकी नेत्र बैंक सूचित करना होता है।
आंख निकालने की प्रक्रिया में मात्र 10 से 15 मिनट का समय लगता है। चेहरे का रूप नहीं बिगड़ता है। नेत्रदान के लिए यह बहुत जरूरी है कि परिवार के सदस्यों को आपकी इस इच्छा के बारे में पहले से पता हो, क्योंकि मृत्यु के बाद दान के लिए परिवार की सहमति अनिवार्य होती है। अध्यक्ष कृष्णा महासेठ ने कहा कि नेत्रदान के महत्व को समझने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। जिले के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त डा. मीनाक्षी कुमारी व झंझारपुर के आचार्य ललित शास्त्री देहदान की घोषणा कर चुके है।वहीं, दधिची देहदान समिति के प्रभाष कुमार, आदित्य सिंह, अमरेश रंजन, राकेश कुमार, मनोज कुमार नेत्रदान की घोषणा कर चुके है। उन्होंने कहा कि पूर्व में पटना में समिति के अध्यक्ष एवं सिक्किम और मेघालय के राज्यपाल रहे गंगा प्रसाद चौरसिया द्वारा समिति के मधुबनी टीम को सम्मानित किया गया था। समिति के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। नेत्रदान और देहदान के मुहिम को आगे बढाया जाएगा।



