
जड़ी-बूटियों और मसालों से रखें अपनी सेहत का ख्याल: बैध संजीव
मधुबनी- 10 जून। अंतरराष्ट्रीय जड़ी बूटी और मसाला दिवस पर शहर के बाटा चौक स्थित श्रीकृष्ण औषधालय में परिचर्चा आयोजित की गई। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के तत्वावधान में परिचर्चा को संबोधित करते हुए समिति अध्यक्ष बैध संजीव कुमार मिश्रा ने कहा कि कई बीमारियों और संक्रमणों का खतरा बढ़ने से इम्युनिटी काफी कमजोर हो जाती है। जड़ी-बूटियां व मसाले इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर होता है। स्वस्थ रहने के लिए जड़ी-बूटियां और मसाले का सेवन कर इम्युनिटी को बूस्ट कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दालचीनी अपनी सुगंध और स्वाद से भोजन का स्वाद बढ़ा देता है। दालचीनी सेहत के लिए भी काफी गुणकारी होती है। इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल गुण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि हल्दी शरीर की न्यूरोप्रोटेक्शन की क्षमता बढ़ाती है। यह बीमारियों के खिलाफ ढाल का काम करती है। यह एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत है। आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाला शिलाजीत एक जरूरी मिनरल है। शिलाजीत शरीर को ऊर्जा देता है। इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। यह प्रजनन अंगों को ताकत देता है। यूरिनरी सिस्टम और किडनी के लिए अच्छा है। खून को साफ करता है और फर्टिलिटी को बढ़ावा देता है।
तुलसी का आध्यात्मिक महत्व होने के साथ ही यह सेहत के लिए भी काफी गुणकारी होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एलर्जी और संक्रमण से लड़ते हैं। ठंड के मौसम में सर्दी-खांसी की समस्याओं से बचने के लिए अदरक एक बढ़िया विकल्प है। अदरक में पाया जाने वाला जिंजरोल गले की खराश की समस्या के लिए एक बढ़िया उपाय है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में जड़ी बूटि सहित अन्य प्राकृतिक चीजों से उत्पाद, दवा और रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ तैयार किए जाते हैं। इनके इस्तेमाल से जीवन सुखी, तनाव मुक्त और रोग मुक्त बनता है। आयुर्वेद हमें स्वस्थ जीवन की दिशा दिखा रहा है। प्राचीन भारत में आयुर्वेद को रोगों के उपचार और स्वस्थ जीवन शैली व्यतीत करने का सर्वोत्तम तरीका माना जाता था। बदलते समय में शरीर और मन का ध्यान रखने के लिए आयुर्वेदिक तरीकों की आवश्यकता है। वात, पित्त, और कफ, हमारे शरीर के नियंत्रित करते हैं । ये तीनों दोष हमारे शरीर में संतुलन की स्थिति को दर्शाते हैं और इनका संतुलित रहना हमें स्वस्थ रखता है। जब इन दोषों में संतुलन बिगड़ जाता है और बिमारियों का कारण बनते हैं।



