
प्राचीन खगोल विज्ञान और ज्योतिष गणना से जुड़ा है मलमास का संबंध: आचार्य संतोष झा
मधुबनी- 14 मई। मलमास माह का संबंध प्राचीन खगोल विज्ञान और ज्योतिष गणना से जुड़ा हुआ है। 17 मई से शुरु होने वाले मलमास माह से जुड़ी जानकारी देते हुए आचार्य संतोष झा ने बताया कि पंचांग चंद्रमा और सूर्य दोनों की गति पर आधारित होता है। सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है। जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है। इस तरह हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बन जाता है। यह अंतर हर 2.5 से 3 साल में बढ़कर करीब एक महीने का हो जाता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या मलमास कहा जाता है। इस संतुलन से पर्व-त्योहार अपने तय मौसम में होता है।
आचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मलमास महीने को पुरुषोत्तम माह भी कहा जाता है। मलमास माह को कोई भी देवता स्वीकार नहीं कर रहा था, जिससे अशुभ माना जाने लगा तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ दिया और कहा कि यह मास भक्ति,साधना और पुण्य अर्जित करने के लिए सबसे श्रेष्ठ होगा, तब से मलमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा। शास्त्रों में भी इस मास का विशेष महत्व बताया गया है। इसे कार्तिक, माघ और वैशाख जैसे पवित्र महीनों के बराबर या उनसे भी ज्यादा फल देने वाला माना गया है।



