बिहार

BIHAR: मधुबनी बाल कल्याण समिति के सदस्य चयन में गड़बड़ी, निदेशालय ने मांगी जांच रिपोर्ट

मधुबनी- 11 मई। मधुबनी बाल कल्याण समिति के सदस्यों के चयन में अनियमितता का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक मामले में निदेशालय द्वारा डीएम से जांच रिपोर्ट मांगा गया है। बता दें कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट) का चयन समाज कल्याण विभाग पटना द्वारा की गई है। पांच सदस्यीय कमेटी में एक अध्यक्ष और 4 सदस्य होते हैं। साल 2024 में समाज कल्याण निदेशालय पटना द्वारा सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष व सदस्यों के चयन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। शॉर्ट लिस्टेड अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू लिया गया। अगस्त 2025 में पांच सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष और चार सदस्य के नाम की घोषणा की गई। जिसमें अनियमितता की शिकायत सामने आया।

बतादें कि सितंबर 2025 में एक अभ्यर्थी शहर के श्यामदेव प्रसाद ने सदस्यों के चयन में धांधली का आरोप लगाते हुए समाज कल्याण विभाग के सचिव, डायरेक्टर, मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियो को आवेदन देकर जांच की मांग की गई। आवेदन में बताया गया कि सदस्य चयन में गृह जिला के अभ्यर्थियों को ही लिया जाता है। नए पैनल बनने के बाद पुराना पैनल स्वतः कैंसिल हो जाता है। नियम के अनुसार कोई भी पुराना पैनल एक साल के बाद समाप्त हो जाता है।मधुबनी सीडब्ल्यूसी में नव चयनित सदस्य मीना कुमारी वर्ष 2010 से 2018 तक दरभंगा जिला में सदस्य रही हैं। पुनः 2024 में दरभंगा गृह जिला का आवासीय प्रमाण पत्र बनाकर आवेदन किया था। शॉर्टलिस्टेड में उनका नाम आने के बाद लिखित परीक्षा उत्तीर्ण नहीं हुई। इसके बाद भी गृह जिला मधुबनी बताकर सदस्य बन गई।

आवेदन में बताया गया है कि नियम-कानून को ताक पर रखकर मीना कुमारी का चयन किया गया। आवेदन में बताया गया है कि मीना कुमारी का एक साथ दो गृह जिला दर्शाया गया है। इन्होंने पहले दरभंगा गृह जिला बताकर आवासीय प्रमाण पत्र बनाया फिर मधुबनी गृह जिला का आवासीय प्रमाण पत्र बनाकर सदस्य बन गई। श्यामदेव प्रसाद ने बतायाफर्जीवाड़ा की वजह से कई अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए हैं। अभ्यर्थी फर्जी प्रमाण पत्र पर सदस्य बन जाते हैं। फर्जी प्रमाणपत्र पर सदस्य सहित फर्जी प्रमाण पत्र निर्गत करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

इस संदर्भ में पूछे जाने पर मीना कुमारी ने मोबाइल पर बताया कि इस मामले में विभाग को लिखित जवाब दे दिया है। बता दें कि बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट द्वारा अनाथ बच्चों, बाल श्रमिक, पॉक्सो से सम्बंधित सहित अन्य मामलों का निष्पादन किया जाता है। बेंच के अधिकार क्षेत्र में बाल गृह ,दत्तक ग्रहण केंद्र और बालिका गृह सहित अन्य गृह आते हैं।

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