
MADHUBANI:- रांटी की मिथिला पेंटिंग्स कलाकारों को दिलाएंगे विश्व स्तरीय पहचान: जितेंद्र मोहन
मधुबनी- 29 मार्च। शहर के रांटी स्थित टीपीसी भवन मे लालमणि मेमोरियल संस्थान नवटोली द्वारा मिथिला पेंटिंग के कलाकारों की समन्वय बैठक की गई। जिसमें इस कला के कलाकारों के समक्ष आने वाली समस्याओं और उसकेसमाधान पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए लालमणि मेमोरियल संस्थान के सचिव जितेंद्र मोहन झा ने कहा कि 29 मार्च 1857 को देश के महान स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडेय ने पश्चिम बंगाल में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था। इस ऐतिहासिक दिन को लालमणी मेमोरियल संस्थान द्वारा मिथिला पेंटिंग्स कलाकारों को उनकी आर्थिक शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि रांटी में मिथिला कला के सैकड़ों कलाकार है।
कलाकारों को को उनकी कलाकृतियों का उचित मूल्य नहीं मिलता है। कलाकार बिचौलियों के शोषण का शिकार हो रहे है। उन्होंने कहा कि रांटी के कलाकारों की कलाकृतियों की देश-दुनिया में कद्रदान है। कुछ कलाकारों की देशभर में पहचान बनी है। जबकि अधिकांश कलाकार बिचौलियों तक सीमित रह गए है। लालमणि मेमोरियल ऐसे कलाकारोंको उनकी कलाकृतियों का उचित मूल्य उपलब्ध कराने, विश्वस्तर पर उनकी पहचान स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि गुमनामी के दौर से गुजर रहे कलाकारों को उनके कलाकृतियों का उचित कीमत व बाजार उपलब्ध कराने, कला प्रेमियों तक सीधा संपर्क के लिए डिजिटल प्लेट फार्म का सहारा लिया जाएगा। बैठक में सीमा दास, कुमारी रीना पासवान, रानी दत्ता, अंजू दत्ता, बुच्ची देवी, अजमतून निशा, रंजीता मिश्रा, रेखा पासवान, संस्था के कोषाध्यक्ष मंगल राय, राजकुमार सहित सैकड़ों कलाकारों ने हिस्सा लिया।



