
MADHUBANI: सूखी होली मनाकर रोके जल का दुरुपयोग, जल की बर्बादी रोकना सभी का कर्तव्य
मधुबनी- 03 मार्च। रंगों का त्योहार होली पर पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए सूखी होली की परम्परा अपनाया जाना निहायत जरूरी हो गया है। होली के साथ ही गर्मी चढ़ते ही कई हिस्सा जलसंकट की समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसे में जल की बर्बादी रोकने के लिए होली उपयुक्त त्योहार माना जा सकता है।गर्मी के दिनों में चापाकल, तालाब व कुआं का पानी पाताल की ओर जाने के साथ ही लोगों में हाहाकार मच जाता है। सोमवार को सूखी होली विषय पर शहर के बाटा चौक स्थित संजीव कुमार मिश्र वैद्य जी की अध्यक्षता में संगोष्ठी आयोजित किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वैद्य जी ने कहा कि होली पर रंगों से छुटकारा के लिए चार गुणा पानी का खर्च बढ़ जाता है। इसके लिए एक व्यक्ति को करीब 60 से 70 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है।
गुलाल के साथ सूखी होली मनाकर पानी का बचत किया जा सकता है। पानी की किल्लत पर काबू के लिए पानी के दुरुपयोग के दिशा में हरेक लोगों को आगे आना होगा। इस दिशा में सरकारी, गैर सरकारी स्तर पर जागरुकता भी चलाई जा रही है। होली पर पानी की बर्बादी किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता। जल को बचाने के लिए सूखी होली बेहतर उपाय है। उन्होंने कहा कि जल की बर्बादी को रोकना सभी का कर्तव्य होता है। सिर्फ होली त्योहार पर जल को बचा लेते हैं तो बड़ी राहत मिलेगी।पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए सूखी होली समय की मांग है। इस दिशा में सभी को गंभीरता से पहल करनी होगी।



