
रामलीला मैदान: 70 साल, 7 तारीखें जिन्होंने सत्ता पलटी: 1 नवंबर से फिर हिलेगी दिल्ली की सत्ता?
“इतिहास गवाह है, रामलीला मैदान में उठी आवाज खाली नहीं जाती। क्या यह रैली भी एक नया अध्याय लिखेगी?”
नई दिल्ली, 01 नवंबर। रामलीला मैदान फिर गूंज उठा। रविवार को कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ महारैली कर हुंकार भरी। मंच पर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पूरा विपक्ष, नीचे हजारों कार्यकर्ता। मांग एक मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा।
लेकिन बात सिर्फ आज की रैली की नहीं है। यह मैदान है ही ऐसा कि जो यहां बोलता है, सत्ता हिलती है।
1.1952 – जनसंघ की पहली ललकार: श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यहीं से धारा 370 और परमिट सिस्टम के खिलाफ सत्याग्रह छेड़ा था। यहीं से कश्मीर का मुद्दा राष्ट्रीय बना।
2.1955-61 नेहरू का विश्व मंच: सोवियत नेता ख्रुश्चेव-बुलगानिन, अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर, ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ दुनिया के ताकतवर नेताओं का स्वागत यहीं हुआ। 1963 में यहीं लता मंगेशकर ने ‘ए मेरे वतन के लोगों’ गाया और जवाहरलाल नेहरू की आंखें भर आईं।
3.25 जून 1975 की रात जिसने इमरजेंसी लगा दी: जेपी यानी जयप्रकाश नारायण ने 1 लाख लोगों के सामने दहाड़ा कि ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।’ इंदिरा गांधी को अवैध PM कहा, सेना-पुलिस से कहा कि गलत आदेश मत मानना। भाषण खत्म होने के 2 घंटे बाद देश में इमरजेंसी लग गई।
4.4-5 जून 2011 – आधी रात का एक्शन: बाबा रामदेव काले धन के खिलाफ अनशन पर थे। आधी रात को पुलिस ने लाठीचार्ज कर मैदान खाली करा दिया। बाबा को सलवार पहनकर मंच से कूदना पड़ा।
5.16 अगस्त 2011 – अन्ना आंधी: 12 दिन तक अन्ना हजारे अनशन पर, रोज 1 लाख लोग, ‘भारत माता की जय’। यहीं से अरविंद केजरीवाल निकले, आम आदमी पार्टी बनी और UPA सरकार की नींव हिल गई।
6.तीन बार शपथ का मैदान: केजरीवाल ने 2013, 2015, 2020 – तीनों बार मुख्यमंत्री की शपथ यहीं ली।
7.31 मार्च 2024 – लोकतंत्र बचाओ रैली: केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद INDIA गठबंधन यहीं जुटा था।
और अब 1 नवंबर 2026 – वोट बचाओ महारैली।



