JDU ने अनंत सिंह को निकाला, पर क्या जाएगी मोकामा की विधायकी? जानिए क्या कहता है दल-बदल कानून
पटना, 24 अक्टूबर। जदयू ने बाहुबली विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व सांसद नीलम देवी को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा जारी आदेश (पत्रांक 234/26) में पार्टी विरोधी गतिविधियों और जन सुराज उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने को कारण बताया गया है।
साथ ही पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की विधायक सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस अनुशंसा से अनंत सिंह की विधायकी चली जाएगी?
कानून क्या कहता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अनंत सिंह की विधायकी फिलहाल सुरक्षित है। संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत किसी विधायक की सदस्यता दो ही स्थितियों में रद्द होती है। एक विधायक खुद स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दे। दूसरा सदन के अंदर पार्टी व्हिप का उल्लंघन करे।
इस मामले में अनंत सिंह ने खुद पार्टी नहीं छोड़ी, बल्कि JDU ने उन्हें निकाला है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में साफ कहा गया है कि पार्टी से निष्कासित होने पर विधायक अयोग्य नहीं होता। वह सदन में असंबद्ध (Unattached) या निर्दलीय विधायक के रूप में बना रहता है।
अध्यक्ष के पास क्या विकल्प है?
JDU की अनुशंसा के बाद विधानसभा अध्यक्ष को दोनों पक्षों को सुनकर फैसला लेना होगा। चूंकि निष्कासन का आदेश खुद JDU ने ही जारी किया है, इसलिए यह साबित करना मुश्किल होगा कि अनंत सिंह ने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ी है।
वहीं, विधान परिषद चुनाव में दूसरे दल का प्रचार करना पार्टी अनुशासनहीनता तो है, लेकिन दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार नहीं है।
ऐसे में फिलहाल अनंत सिंह मोकामा से निर्दलीय विधायक के तौर पर बने रहेंगे। हां, अगर वे अब खुद किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो उनकी सदस्यता जाना तय माना जाएगा।



