
कन्या में ही है नौ दुर्गा का वास, विधि-विधान से पूजन करने पर मिलता है नवरात्र का पूर्ण फल: पं. शंभूनाथ झा
मधुुबनी – 19 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन और कन्या भोजन का विशेष महत्व है। इस विषय पर मिथिला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा ने बताया कि नवरात्र में कन्या पूजन के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। पं. झा ने बताया कि शास्त्रों में 2 से 10 वर्ष तक की कन्या को देवी स्वरूप माना गया है।
पं. झा ने बताया कि 2 वर्ष की कुमारी, 3 वर्ष की त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कल्याणी, 5 वर्ष की रोहिणी, 6 वर्ष की कालिका, 7 वर्ष की चंडिका, 8 वर्ष की शांभवी, 9 वर्ष की दुर्गा और 10 वर्ष की सुभद्रा स्वरूप में पूजा की जाती है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष अष्टमी-नवमी एक ही दिन 19 अक्टूबर को पड़ने से कन्या पूजन 19 अक्टूबर को ही श्रेष्ठ रहेगा। कन्या पूजन के दिन सुबह स्नान कर कन्याओं के पैर धोकर, रोली-अक्षत से तिलक कर, चुनरी ओढ़ाकर फल, हलवा-पूरी, चना और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लेना चाहिए। एक बालक (बटुक भैरव) को भी भोजन कराना आवश्यक है।
पं. शंभूनाथ झा ने कहा कि कन्या पूजन के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि कन्याओं को भोजन प्रेम से कराएं, उन्हें डांटे नहीं और कन्या भोजन के समय स्वयं भी व्रतधारी मौन रहकर प्रसाद ग्रहण करें। इससे मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि व संतान सुख की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि मंदिरों में सामूहिक कन्या भोज कराने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।



