
उत्तराखंड:- 10 स्थानों के पेयजल सैंपलों में मिले घातक बैक्टीरिया, हाई कोर्ट ने दूषित पानी के स्रोतों की मांगी विस्तृत रिपोर्ट
नैनीताल- 29 सितंबर। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में नैनीताल के ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण फैली बीमारी के मामले पर मंगलवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में जिलाधिकारी, सीएमओ तथा जल संस्थान व जल निगम के अधिकारी उपस्थित रहे। कोर्ट ने संक्रमण के मूल जल स्रोतों के संबंध में जानकारी देने के निर्देश देते हुए कहा कि अगली तिथि तक दूषित पानी के स्रोतों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्टों में बताया गया कि वीरभट्टी, बेलुआखान और सरिताताल समेत 10 स्थानों से लिए गए पेयजल सैंपलों की इंडियन ड्रिंकिंग वाटर लैब में हुई जांच में घातक बैक्टीरिया मिले। खुर्पाताल क्षेत्र के निवासियों ने भी सरिता ताल के पास सीवर लाइन चोक होने से पेयजल स्रोतों में गंदगी मिलने तथा बीमारी फैलने की आशंका के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया।
अदालत ने संस्थान व निगम अधिकारियों से ग्रामीणों द्वारा एक माह पूर्व की गई बदबूदार पानी की शिकायत पर समय से संज्ञान न लेने पर नाराजगी जताई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि टैंकरों के माध्यम से सप्लाई किए जा रहे पानी में अत्यधिक क्लोरीन मिलाया जा रहा है, जिससे प्रभावित लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहे हैं। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की सीधी निगरानी करने और व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों से तत्काल फ्रेश सैंपल लेने तथा संपूर्ण नैनीताल क्षेत्र में पेयजल की टेस्टिंग कराने के भी आदेश दिए। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की सीएमओ को प्रभावित परिवारों की स्थिति पर अलग से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 06 अक्टूबर नियत करते हुए कहा कि यदि सरकार अगली सुनवाई तक बीमारी फैलने के मुख्य कारणों पर ठोस जवाब नहीं देती, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए जाएंगे।



