भारत

शिक्षण संस्थानों को भविष्य के अनुकूल बनाने की जरूरत: राष्ट्रपति मुर्मू

नई दिल्ली- 03 सितंबर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि शिक्षण संस्थानों को भविष्य के अनुकूल बनाने की जरूरत है। इसके लिए एक नए शिक्षण-अधिगम मैट्रिक्स, शिक्षाशास्त्र और सामग्री की आवश्यकता होगी जो भविष्योन्मुखी हों।

राष्ट्रपति मुर्मू भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के हीरक जयंती उत्सव के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों को राष्ट्र का गौरव बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आईआईटी ने दुनिया को शिक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की क्षमता साबित की है। आईआईटी देश का गौरव रहे हैं और उनकी कहानी स्वतंत्र भारत की कहानी है। आईआईटी ने आज वैश्विक मंच पर भारत की बेहतर स्थिति में बहुत योगदान दिया है। आईआईटी के फैकल्टी और पूर्व छात्रों ने दुनिया को हमारी बौद्धिक शक्ति दिखाई है। आईआईटी दिल्ली और अन्य आईआईटी के पूर्व छात्र अब दुनिया में व्यापक डिजिटल क्रांति में सबसे आगे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि यदि हम भविष्य की अनिश्चितताओं से खुद को बचाने के लिए कदम उठाते हैं, तो हम समृद्ध जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त कर सकते हैं। हमें अपने संस्थानों को भविष्य के अनुकूल बनाने की जरूरत है। इसके लिए एक नए शिक्षण-अधिगम मैट्रिक्स, शिक्षाशास्त्र और सामग्री की आवश्यकता होगी जो भविष्योन्मुखी हों। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे प्रसिद्ध आईआईटी के साथ, हम चुनौती का सामना करने के लिए आवश्यक ज्ञान के आधार और सही कौशल के साथ युवा पीढ़ी का पोषण करने में सक्षम होंगे।

इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चुनौती है, राष्ट्रपति ने कहा कि एक उच्च जनसंख्या आधार वाले विकासशील देश के रूप में, आर्थिक विकास के लिए हमारी ऊर्जा की आवश्यकता बहुत अधिक है। इसलिए हमें जीवाश्म ईंधन से अक्षय ऊर्जा की ओर शिफ्ट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में, जैसा कि दुनिया उत्सुकता से पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए तकनीकी समाधानों की तलाश कर रही है, उन्हें विश्वास है कि भारत के युवा इंजीनियर और वैज्ञानिक मानव जाति को एक सफलता हासिल करने में मदद करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई में आईआईटी दिल्ली का योगदान एक मॉडल रहा है कि कैसे इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान भी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार, राजकुमार रंजन सिंह और भारत सरकार के प्रमुख बैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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