
MADHUBANI:- अंचल,मत्स्य और नगर निगम प्रशासन की उदासीन रवैया से मिट जाएगा तालाबों का वजूद: अजय यश
मधुबनी- 22 अप्रैल। मधुबनी के वरीय अधिवक्ता अजय यश ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र की 32 तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराकर तालाबों की वास्तविक स्थिति में लाना जाना समय की मांग हो चुकी है। इस दिशा में ‘लक्ष्य तक’ का ‘पारंपरिक जल स्रोत जल संरक्षण की सफर’ अभियान तालाबों के संरक्षण में कारगर साबित होगा।
जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन द्वारा निगम क्षेत्र के 32 तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई में शहर के लोगों को अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि तालाबों को अतिक्रमण मुक्त होने से समाज को बड़ा लाभ मिलेगा। तालाब को बचाने का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। तालाबों की महता से लोगों को सीख लेने की जरूरत है। वर्ना आने वाले सालों में नगर निगम क्षेत्र से तालाबों का वजूद मिट जाएगा। अतिक्रमित बदहाल तालाबों को अतिक्रमण मुक्त के लिए सामाजिक राजनीतिक क्षेत्र के लोगों को खुलकर सामने आना होगा। उन्होंने कहा कि अतिक्रमित तालाबों से जंगल-झाड़ की सफाई कर तालाबों की गहराई बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वर्षा जल का संचय हो सके। इससे इलाके में जलजमाव से भी छुटकारा मिलेगा। वर्षा जल को बर्बाद होने से बचाना जा सकता है।
तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जिलाधिकारी और नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई से बड़ी उम्मीद की जा रही है। इससे वर्षा जल का संचय होने से भूगर्भ के जल की बचत होगी। इसका व्यापक लाभ आने मिलेगा। तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराकर उसे जीवित करने के लिए लोगों की उम्मीद पूरा हो सकता है। इसके लिए लोगों को जिला प्रशासन की तालाब अतिक्रमण मुक्त कार्रवाई में सहयोग करना चाहिए। जल संरक्षण के दिशा में परंपरागत जल स्त्रोतों को जीवित करने के भविष्य में जलसंकट पर काबू पाया जा सकता है। तालाबों के अतिक्रमण करने वालों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई किया जाना चाहिए।



