
MADHUBANI: ‘कथा 89 की’ अतिक्रमित महंतीलाल पोखर में एक दशक से नहीं हो रहा मछली पालन, राजस्व का भारी नुकसान
मधुबनी- 10 जुलाई। शहर के खेसर 89 की जमीन को लेकर नगर थाना में दर्ज प्राथमिकी ने सैरात सूची में शामिल शहरी क्षेत्र के 32 तालाबों के प्रति लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है। इसके बाद भी शहर की तालाबों की दशा को लेकर रहिका अंचल प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। अंचल प्रशासन की लगातार उदासीनता के कारण सैरात सूची की तालाबों का अतिक्रमण और उसकी जमीन की अवैध रूप से खरीद-फरोख्त का जंजाल बढ़ता जा रहा है। बता दें कि सैरात सूची में शामिल अतिक्रमित शहर के महंतीलाल पोखर की रखरखाव के प्रति अंचल कार्यालय की लापरवाही का अंदाजा इस तरह लगाया जा सकता है कि महंतीलाल पोखर पूरी तरह जलकुंभी और कचरा से पटा है। जलकुंभी का होना तालाब के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है।
कूड़ा-कचड़ा और जलकुंभी के कारण एक दशक से मछली पालन बंद है। जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। शहरी क्षेत्र की अतिक्रमित 32 में शामिल महंतीलाल पोखर के चहुंओर अतिक्रमणकारियों ने सालों से घर, मकान और दुकान बना रखा है। लेकिन अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। घनी आबादी के बीच की दो दशक पूर्व तक इस पोखर की काफी अहमियत थी। सालों से पोखर के तीन ओर झुग्गी-झोपड़ी से लेकर अनेक बिल्डिंग नजर आ रहे हैं। सैरात सूची में शामिल इस पोखर कि हालत में कोई सुधार दिखता नजर नहीं आ रहा है। पोखर की जमीन की खरीद-फरोख्त की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है। रहिका अंचल कार्यालय की उदासीनता से इस तालाब के जीर्णोद्धार पर ग्रहण लगा है। जानकारी के मुताबिक कई भू-माफियाओं की नजर इस पोखर की जमीन पर लगी है।



