
बिहार
MADHUBANI:- सड़क हादसे में एमबीबीएस छात्र ध्रुव नारायण यादव की मौत, महदेवा गांव में पसरा मातम
मधुबनी- 09 सितंबर। घोघरडीहा प्रखंड क्षेत्र के महदेवा गांव में बुधवार को ऐसा मातमी सन्नाटा पसरा कि हर आंख नम हो गई। महदेवा गांव निवासी एवं इनरवा पंचायत के पूर्व उपमुखिया राम बहादुर यादव के 21 वर्षीय पुत्र ध्रुव नारायण यादव की मंगलवार की देर रात पटना में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। ध्रुव नारायण यादव पटना मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र था और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने का सपना संजोए हुए था. महज 21 वर्ष की उम्र में सड़क हादसे ने उसकी जिंदगी के साथ-साथ परिवार के उन सपनों को भी छीन लिया। जिन्हें लेकर पूरा परिवार भविष्य की उम्मीद लगाए बैठा था.ध्रुव की मौत की खबर जैसे ही महदेवा गांव पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. देखते ही देखते राम बहादुर यादव के घर लोगों की भीड़ जुटने लगी. हर कोई इस हृदयविदारक खबर से स्तब्ध था. जिस घर में बेटे के डॉक्टर बनने की चर्चा और भविष्य के सपने बुने जा रहे थे, वहां अचानक चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया।
बुधवार को पटना से ध्रुव का शव गांव पहुंचते ही माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया—
बुधवार को शव के घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल दहल उठा. बेटे का शव देखकर माता-पिता बेसुध हो गए। उन्हें संभालने के लिए पहुंचे ग्रामीणों और रिश्तेदारों की आंखें भी छलक उठीं. परिवार के दर्द को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. ग्रामीणों ने ध्रुव की असामयिक मौत को पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया. लोगों का कहना था कि ध्रुव पढ़ाई में होनहार था और डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की सेवा करना चाहता था. उसकी मेहनत, प्रतिभा और भविष्य को लेकर गांव के लोगों को भी काफी उम्मीदें थीं. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
दो भाइयों में सबसे बड़ा था ध्रुव, परिवार की उम्मीदों का वह मजबूत सहारा था—-
एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने और समाज की सेवा करने का उसका सपना था, पर सड़क हादसे ने न सिर्फ एक होनहार मेडिकल छात्र की जिंदगी छीन ली, बल्कि एक परिवार की उम्मीदों और पूरे गांव के भविष्य के एक उजले सपने को भी हमेशा के लिए तोड़ दिया. ध्रुव की मौत की खबर से महदेवा गांव ही नहीं, बल्कि पूरे घोघरडीहा प्रखंड क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों को सांत्वना देने के लिए दिनभर लोगों का तांता लगा रहा. हर कोई यही कहता नजर आया कि “इतनी कम उम्र में एक होनहार डॉक्टर को खो देना पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है।



