भारत

परंपरा और आधुनिकता में संतुलन बनाकर सांस्कृतिक विरासत को बचाना जरूरी: C.P राधाकृष्णन

मुंबई- 18 सितंबर। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। आधुनिक बुनियादी ढांचे,तकनीक और आर्थिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से मजबूत जुड़ाव बनाए रखना ही विकसित भारत की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भाषा, कला, परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण विकास का अहम हिस्सा होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन शुक्रवार को श्री गणेश कला-क्रीड़ा रंगमंच, स्वारगेट में पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राधाकृष्णन ने कहा कि पुणे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी है। पुणे फेस्टिवल ने कला, संस्कृति, संगीत, नृत्य, साहित्य, खेल और पर्यटन को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। अलग-अलग देशों के कलाकारों, पर्यटकों, प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों की भागीदारी से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के फेस्टिवल में 21 देशों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया है। विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान भारत के सांस्कृतिक जीवन की विशेषता है।

राधाकृष्णन ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का विचार समावेशी, समानता पर आधारित और सांस्कृतिक विरासत की जड़ों से जुड़ा होना चाहिए। हर क्षेत्र, समाज के हर वर्ग और प्रत्येक नागरिक को विकास की प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुणे फेस्टिवल जैसे आयोजन स्थानीय कलाकारों, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अवसर देने के साथ-साथ दुनिया के सामने भारत की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करते हैं। पुणे फेस्टिवल के लगातार आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए राधाकृष्णन ने फेस्टिवल के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय सुरेश कलमाडी के योगदान को भी याद किया।

वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास: राज्यपाल

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि गणेशोत्सव को आधिकारिक तौर पर ‘महाराष्ट्र का त्योहार’ माना गया है। गणेशोत्सव के दौरान आयोजित पुणे फेस्टिवल विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और सरकार वैश्विक स्तर पर महाराष्ट्र में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। भविष्य में पुणे फेस्टिवल को विस्तार देकर एक वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं। राज्यपाल ने कहा कि पुणे का महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे देश के इतिहास और सांस्कृतिक जीवन में विशेष स्थान है। यह महात्मा ज्योतिराव फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की कर्मभूमि रही है और सामाजिक समानता तथा महिला शिक्षा के आंदोलनों को यहां से मजबूती मिली।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार, पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे, सांसद हेमा मालिनी, सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी, पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल, मीरा सुरेश कलमाडी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Follow on X-twitter Follow
Follow on Pinterest Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!