
मधुबनी पेंटिंग से जुड़े कलाकारों को अब मिलेगा अधिकतक मेहनताना, मिथिला पेंटिंग-सह-ई-कॉमर्स पोर्टल का शुभारंभ
108 मीटर लंबी रामायण आधारित मिथिला पेंटिंग ने रचा विश्व रिकॉर्ड
मधुबनी- 15 अगस्त। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मधुबनी में मिथिला की समृद्ध कला,संस्कृति एवं परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मिथिला पेंटिंग-सह-ई-कॉमर्स पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रामचरितमानस पर आधारित 108 मीटर लंबी विशाल मिथिला पेंटिंग रही, जिसमें रामायण की संपूर्ण गाथा को मिथिला चित्रकला की पारंपरिक शैली में 52 विषय-वस्तुओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।

लगभग 180 कलाकारों की सहभागिता से चार दिनों में साकार हुई ऐतिहासिक कलाकृति—
108 मीटर लंबी इस विशाल कलाकृति का निर्माण मिथिला चित्रकला संस्थान के लगभग 180 वर्तमान एवं पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं की सहभागिता से किया गया। चार दिनों के सामूहिक एवं सृजनात्मक प्रयास में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को मिथिला चित्रकला के पारंपरिक रंगों, रेखाओं,प्रतीकों एवं चित्रांकन शैली के माध्यम से जीवंत रूप प्रदान किया गया।
इस ऐतिहासिक सृजन का कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन संस्थान के तीनों पद्मश्री कलाकारों—पद्मश्री बौआ देवी,वरीय आचार्य; पद्मश्री दुलारी देवी, आचार्य; एवं पद्मश्री शिवन पासवान, डॉ. रानी झा, श्री संजय कुमार जायसवाल एवं श्री प्रतीक प्रभाकर,कनीय आचार्य द्वारा किया गया।
पेंटिंग के निर्माण के दौरान चित्रों के साथ-साथ रामचरितमानस के श्लोकों एवं दोहों का पाठ भी किया गया। इससे यह प्रस्तुति दृश्य कला, साहित्य, आध्यात्मिक परंपरा एवं मिथिला की लोक-संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में सामने आई।
वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन द्वारा किया गया मानकीकरण—
108 मीटर लंबी इस ऐतिहासिक कलाकृति का वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के प्रतिनिधि श्री क्रिस्टोफर की उपस्थिति में विधिवत लोकार्पण एवं मानकीकरण किया गया। इस अवसर पर वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के प्रतिनिधि द्वारा जिला पदाधिकारी, मधुबनी को वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र एवं मेडल प्रदान किया गया।
यह उपलब्धि मिथिला चित्रकला की प्रतिभा एवं समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में यह अनूठी कलाकृति मिथिला ललित कला संग्रहालय में प्रदर्शित है, जहाँ आमजन एवं कला-प्रेमी इसका अवलोकन कर सकते हैं।
राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने मिथिला की कला, संस्कृति एवं परंपरा की समृद्ध विरासत की सराहना करते हुए कहा कि मिथिला पेंटिंग केवल एक कला विधा नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान एवं लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल मिथिला की कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मंत्री, भवन निर्माण विभाग, बिहार सरकार श्रीमती लेसी सिंह ने मिथिला की कला एवं संस्कृति की विशिष्ट पहचान की सराहना करते हुए इसके संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रामायण की संपूर्ण गाथा को मिथिला चित्रकला के माध्यम से इतने व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना कलाकारों की प्रतिभा, परिश्रम एवं सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा ने कहा कि मिथिला की कला सदियों से अपनी विशिष्ट शैली, रंग-संयोजन एवं सांस्कृतिक गहराई के लिए प्रसिद्ध रही है। रामायण आधारित 108 मीटर लंबी यह कलाकृति मिथिला की कला परंपरा को नई ऊँचाई प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य मिथिला की कला एवं कलाकारों को आधुनिक तकनीक और व्यापक बाजार से जोड़ना है।
ई-कॉमर्स पोर्टल से ‘स्थानीय कला से वैश्विक बाजार’ तक—
जिला पदाधिकारी, मधुबनी के ड्रीम प्रोजेक्ट के अंतर्गत, निदेशक, मिथिला चित्रकला संस्थान के सतत मार्गदर्शन तथा उप-निदेशक, लेखा पदाधिकारी एवं संबंधित पदाधिकारी-कर्मियों के सार्थक प्रयासों से मिथिला पेंटिंग-सह-ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित किया गया है। 15 अगस्त को इसका लाइव प्रदर्शन एवं विधिवत उद्घाटन किया गया।
यह डिजिटल मंच मिथिला के कलाकारों को अपनी पेंटिंग, हस्तशिल्प एवं अन्य कलात्मक उत्पादों को देश-विदेश के व्यापक बाजार तक सीधे पहुँचाने का अवसर प्रदान करेगा। इसके माध्यम से कलाकारों को उचित मूल्य, नए ग्राहक एवं बाजार की व्यापक संभावनाएँ प्राप्त होंगी। इससे उनकी आय, पहचान एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल मिथिला की पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल युग से जोड़ते हुए ‘स्थानीय कला से वैश्विक बाजार’ तक पहुँच बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी कदम है।
कार्यक्रम के दौरान गणमान्य अतिथियों का स्वागत-सह-तिरंगा यात्रा के माध्यम से मिथिला ललित कला संग्रहालय तक आगमन हुआ। संग्रहालय में ऐतिहासिक 108 मीटर लंबी पेंटिंग का अवलोकन करने के पश्चात मिथिला चित्रकला संस्थान के बहुउद्देशीय सभागार में अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। इसके बाद दीप प्रज्वलन के साथ ई-कॉमर्स पोर्टल का उद्घाटन किया गया।
मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित—
इसके पश्चात पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। मिथिला चित्रकला संस्थान में संचालित त्रिवर्षीय डिग्री कोर्स एवं छह माह के सर्टिफिकेट कोर्स के विभिन्न सेमेस्टरों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त अपने-अपने वर्ग में सर्वाधिक उपस्थिति दर्ज कराने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित रहे गणमान्य अतिथि एवं पदाधिकारी
कार्यक्रम में माननीय मंत्री, भवन निर्माण विभाग, बिहार सरकार श्रीमती लेसी सिंह, माननीय राज्यसभा सांसद श्री संजय कुमार झा, जिला पदाधिकारी, मधुबनी श्री आनंद शर्मा, अपर समाहर्त्ता, मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक, उप-निदेशक, लेखा पदाधिकारी, आचार्यगण सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं संचालन में श्री नीतीश कुमार, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-उप-निदेशक, मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी; श्री सुरेन्द्र प्रसाद यादव, लेखा पदाधिकारी; पद्मश्री बौआ देवी, वरीय आचार्य; पद्मश्री दुलारी देवी, आचार्य; पद्मश्री शिवन पासवान; डॉ. रानी झा; श्री संजय कुमार जायसवाल; श्री प्रतीक प्रभाकर, कनीय आचार्य; रूपा कुमारी, सहायक; मो. सरफराज; मो. अरमान रजा; श्री अर्जुन कुमार; श्री नीतीश कुमार; श्री विकास कुमार गुप्ता एवं श्री अभिषेक कुमार, डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित मिथिला चित्रकला संस्थान के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
108 मीटर लंबी, 52 विषय-वस्तुओं के माध्यम से रामायण की संपूर्ण गाथा को मिथिला कला में अभिव्यक्त करने वाली यह ऐतिहासिक कलाकृति और कलाकारों को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला ई-कॉमर्स पोर्टल—मधुबनी की कला, संस्कृति एवं कलाकारों को नई पहचान, नए अवसर और नई ऊँचाइयाँ प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।



