
आस्था का सावन: सावन श्रद्धा के साथ शिव आराधना का महपर्व, भक्ति और साधना का विशेष अवसर: राजीव राय
मधुबनी 13 अगस्त। शिव पुराण सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महान ग्रंथ है। इसमें भगवान शिव के स्वरूप, उनकी लीलाओं, भक्ति और ज्ञान का विस्तृत वर्णन है। इस पावन ग्रंथ के पठन और श्रवण मात्र से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। शिवलोक की प्राप्ति होती है। शिव पुराण में लगभग 24,000 श्लोक है। यह सात संहिताओं में विभाजित है। इसे सुनने या पढ़ने से मन पवित्र होता है। इससे भगवान शिव के प्रति प्रेम और सात्विक ज्ञान बढ़ता है।
शिव पुराण,लिंग पुराण और स्कंद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में सावन को शिव की आराधना का सर्वश्रेष्ठ समय बताया गया है। भगवान शिव की महिमा का चर्चा करते हुए शिव भक्त राजीव राय ने कहा कि सावन माह भक्त श्रद्धा के भाव से व्रत रखते हैं, ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं।
शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन श्रद्धा के साथ शिव आराधना का पर्व है। यह महीना भक्ति व्रत और आत्मा के जागरण का विशेष अवसर है। जिसमें प्रकृति भी भक्तिभाव में लीन हो जाती है। सावन आत्मनियंत्रण, भक्ति और तप का प्रतीक है। श्रद्धालु कठिन तप उपचार और नियमों का पालन कर भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं।
राजीव राय ने कहा कि सावन और शिव का संबंध अत्यंत गहरा है। यह माा शिवत्व से आत्मा के मिलन का सेतु है। सावन में धरती वर्षा से हरी-भरी हो जाती है। भक्त इस माह भगवान शिव की कृपा से आत्मिक रूप से पुष्ट होता है। भगवान शिव अल्प भक्ति से भी शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।



