
दो दिवसीय रंग महोत्सव में महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटकों का होगा मंचन, सम्मानित होंगे रंगकर्मी
मधुबनी- 26 मई। स्थानीय नगर भवन में 29 व 30 मई को दो दिवसीय रंग महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसमें देश के प्रसिद्ध महेन्द्र मलंगिया लिखित दो नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, मधुबनी में कला संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करने वाले कलाकार, संस्था और संचालक को मधुबनी रंग सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इसकी जानकारी देते हुए कार्यक्रम के आयोजक संस्था लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान के सचिव प्रो. महेन्द्र लाल कर्ण ने बताया कि मधुबनी रंग महोत्सव के प्रथम दिन प्रसिद्ध नाट्य संस्था रंगरेज मिथिला द्वारा साहित्य पुरस्कार से सम्मानित ऋषि वशिष्ठ के निर्देशन में ‘पुस जाड़ कि माघ जाड़’ और दूसरे दिन लोकहित रंगपीठ द्वारा हर्षित आर्यन के निर्देशन में ‘लक्ष्मण रेखा खंडित’ नाटक की प्रस्तुति की जाएगी। महोत्सव में नाट्य और फिल्म क्षेत्र से जुड़े रंगकर्मी अनिल मिश्रा, रंजीत रॉय, रौशन कुमार, रमेश कुमार, पंचम प्रकाश, अभिषेक आकाश, सुजीत कुमार, अंजली कुमारी, लोक कलाकार रमेश मंडल, हर्षित आर्यन, राजनीति रंजन, जटाधर पासवान, रविशंकर मिश्र, विक्रांत कुमार, भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा के राष्ट्रीय सचिव इंद्रभूषण रमन बमबम, नाट्य एवं फिल्म के लेखक निर्देशक श्याम भास्कर, जानकी कैसेट से प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सुनील झा को मधुबनी रंग सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्यशास्त्र के प्राध्यापक महेन्द्र लाल कर्ण ने बताया कि मिथिला चित्रकला के प्रति समर्पित डॉ. रानी झा, कौशिक कुमार झा, नितिन रावत और रूपा कुमारी को मधुबनी रंग सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। मधुबनी में वर्ष 1991 के फरवरी में स्थानीय महिला कॉलेज परिसर में मोहन राकेश लिखित नाटक आधे अधूरे से मधुबनी में आधुनिक रंगमंच की शानदार शुरुआत हुई थी। जिसमें पहली बार स्त्री पात्र की भूमिका में तीन लड़कियां शामिल हुई थी। उसके बाद वर्ष 2000 तक नगर भवन में प्रत्येक वर्ष तीन चार नाटक का मंचन होता रहा। कई नाट्य संस्थाओं का निर्माण हुआ। मधुबनी की रंग गतिविधि बिहार में चर्चा में बनी रही। नगर भवन का आरक्षण बंद होने से नाट्य गतिविधियों पर अंकुश लग गया। वर्तमान जिलाधिकारी द्वारा नगर भवन उपलब्ध कराने से पुनः नाट्य गतिविधियां सहित अन्य सांस्कृतिक संस्थाओं को कार्यक्रम की सुविधा होगी।



