बिहार

नीट पेपर लीक मामलें में शिक्षा मंत्री की चुप्पी बड़ा सवाल, सीबीआई जांच का मतलब लीपापोती: विजय यादव

मधुबनी – 13 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित अधिकांश केंद्रीय मंत्री बंगाल सहित अन्य राज्यों में एनडीए की सरकार की गठन में व्यस्त रहे। इसी बीच देश में नीट का पेपर लीक हो गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पेपर लीक मसले पर चुप्पी साध लिया है। पेपर लीक मामलों में राजनीतिक संरक्षण को नकारा नहीं जा सकता है।

उक्त बातें फुलपरास विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सह दुर्गा माता मंदिर सेवा ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार यादव ने कहीं। उन्होंने कहा कि पिछले नौ साल में नीट का पेपर चार बार लीक हुआ। लेकिन किसी भी आरोपी को सजा नहीं मिली। इसमें ऊपर तक के लोगों की मिलीभगत होती है। परीक्षार्थियों का मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट सरकार ने कुचल दिया। नीट का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंप दिया गया है। यह परीक्षा 3 मई को हुई थी। इसमें 22.79 लाख छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया था। एक सप्ताह में परीक्षा की नई तिथी की घोषणा किए जाने का आश्वासन एनटीए के डीजी ने दिया है। मामला को सीबीआई को सौपने का मतलब लीपापोती है।

उन्होंने कहा कि नीट को भी जे॓ईई की तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट सीबीटी में बदल देना चाहिए। पेन-एंड-पेपर मोड में पेपर लीक होने का खतरा ज्यादा रहता है, जबकि कंप्यूटर आधारित परीक्षा ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी होती है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में आयोजित करने वाले सिस्टम में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने कहा कि साल 2024 में भी नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के चलते कुछ सेंटर्स पर रद्द कर दी गई थी। परीक्षा 5 मई 2024 को हुई थी। 6 मई को एनटीए ने पेपर लीक की बात से इनकार किया था। इसके बाद पटना और हजारीबाग में जांच हुई। जांच में पेपर लीक के सबूत मिले और कई गिरफ्तारियां भी हुईं थीं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था। कुछ सेंटर पर 1539 कैंडिडेट्स की दोबारा परीक्षा हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के अलावा 67 छात्रों को 720/720 अंक मिलना और एक ही केंद्र से कई टॉपर्स का आना भी बड़े विवाद का कारण बना था। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है।

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