भारत

KCR की बेटी के. कविता ने बनाई नई पार्टी ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’

हैदराबाद- 25 अप्रैल। प्रचंड गर्मी के बीच तेलंगाना की राजनीति में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब पूर्व विधान पार्षद (एमएलसी) कलवकुंतला कविता ने नई राजनीतिक पार्टी तेलंगाना राष्ट्र सेना (टीआरएस) के गठन की घोषणा कर दी। इस फैसले को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पुत्री और पूर्व में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की प्रमुख नेता रहीं के. कविता का पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय से मतभेद चल रहा था। आंतरिक विवादों के चलते उन्हें जून 2025 में पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने एमएलसी पद और बीआरएस की प्राथमिक सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया था।

बीआरएस से अलग होने के सात महीने बाद कविता ने अपनी नई पार्टी के लिए वही नाम टीआरएस चुना है, जिसके साथ उनके पिता ने कभी तेलंगाना राज्य आंदोलन की शुरुआत की थी। इस नाम के चयन को राजनीतिक रूप से बेहद प्रतीकात्मक माना जा रहा है।

के. कविता ने स्पष्ट किया कि उनकी नई पार्टी का मुख्य फोकस तेलंगाना के क्षेत्रीय मुद्दे, सामाजिक न्याय और पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग होगा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की मूल भावना और जनता की अपेक्षाओं को फिर से केंद्र में लाना उनकी प्राथमिकता है।

अपनी नई पार्टी की शुरुआत से पहले उन्होंने हैदराबाद के गन पार्क स्थित अमरवीर स्तूप पर 1969 के तेलंगाना आंदोलन के शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद हैदराबाद के बाहरी क्षेत्र मुनीराबाद में आयोजित पार्टी लॉन्च कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री बनने और राज्य में “नई क्रांति” लाने का संकल्प दोहराया।

उन्होंने खुद को जनता की “अम्मा” बताते हुए कहा कि वह तेलंगाना की मातृत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ता बनना चाहती हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी तुलना तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता से भी की।

अपने संबोधन में कविता ने आत्ममंथन करते हुए कहा कि उन्हें बीआरएस सरकार के कुछ कार्यों पर शर्म महसूस होती है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह उस सत्तारूढ़ परिवार का हिस्सा थीं, जिसने पार्टी और प्रशासन दोनों का नेतृत्व किया। हालांकि उन्होंने तेलंगाना राज्य आंदोलन में अपनी भूमिका और अलग राज्य की प्राप्ति पर गर्व भी जताया।

उन्होंने कहा कि “तेलंगाना राष्ट्र सेना” पुरानी गलतियों को सुधारने और राज्य को आंदोलन की मूल आकांक्षाओं से फिर जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने ‘तेलंगाना जागृति’ और अपने व्यक्तिगत योगदान का भी उल्लेख किया।

अपने पिता के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाले आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ तेलंगाना आंदोलन का रथ अपनी दिशा से भटक गया और जनता की वास्तविक समस्याओं को पूरी तरह समझने में विफल रहा। उन्होंने कहा, “तेलंगाना का सामाजिक रथ टुकड़ों में टूट गया है।”

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, के. कविता का यह कदम बीआरएस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ‘तेलंगाना भावना’ और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़ा हुआ है।-

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