
MADHUBANI:- शहर के कीर्तन भवन तालाब की जमीन पर खड़ी हो गई घर-मकान और बिल्डिंग, चैन की बंशी बजाता रहा अंचल, मत्स्य और निगम प्रशासन
"लक्ष्य तक की 'पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर' अभियान"
— नगर निगम क्षेत्र की तालाबों, सरोवर, कुआं की दशा को लेकर ‘लक्ष्य तक’ ने ‘पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत प्रथम चरण में नगर निगम क्षेत्र की एक तालाब की प्रतिदिन पड़ताल होगी। उम्मीद है कि जल संरक्षण के दिशा में यह अभियान शासन-प्रशासन और आम लोगों के बीच की सार्थक कड़ी साबित होगी। ‘पारंपरिक जलस्त्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान के दूसरे दिन प्रस्तुत है नगर निगम क्षेत्र के कीर्तन भवन तालाब की पड़ताल। अभियान को लेकर निगम क्षेत्र की तालाब संबंधी जानकारी हमें वाटसएप पर उपलब्ध कराई जा सकती है। जिसे ‘लक्ष्य तक’ पर जगह दी जा सकती है।
मधुबनी- 22 अप्रैल। नगर निगम क्षेत्र के कीर्तन भवन तालाब के चहुंओर नजर दौड़ने से स्पष्ट हो जाता है कि इस तालाब के अतिक्रमण का दायरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि मत्स्य विभाग ने भी माना है कि यह तालाब अतिक्रमित है। खासकर तालाब के पूरव कीर्तन भवन रोड होकर टाउन क्लब मैदान जाने वाली सड़क की ओर से करीब एक दर्जन मकान-भवन का निर्माण जांच के दायरा में आता है। इस निर्माण कार्य को लेकर रहिका मत्स्यीजीवी सहयोग समिति द्वारा मत्स्य विभाग को लगातार जानकारी दिए जाने के बाद भी निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई गई। जिससे अतिक्रमणकारियों और दबंगों की मनमानी बढ़ती चली गई। अतिक्रमण के चलते इस तालाब की पहचान कर संकट बना है। रहिका अंचल सैरात सूची में शामिल खेसरा नं. 4465, 4668 रकवा 1 बीधा 21 डीसमल वाली कीर्तन भवन तालाब की चहुंओर भिंडा पर अनेकों घर-भवन देखा जा सकता है। घाट विहिन शहर के कीर्तन भवन तालाब का स्थानीय लोगों को वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। रहिका अंचल कार्यालय, मत्स्य विभाग और नगर निगम प्रशासन की उपेक्षा का शिकार कीर्तन भवन तालाब अतिक्रमणकारियों के चंगुल में आ गया है। तालाब के चारों ओर फैली गंदगी और तालाब की दूषित चुके पानी की निकासी नहीं होने के चलते गर्मी के समय तालाब की मछलियों का मरने की शिकायत सामने आने लगी है। पिछले साल जून में कीर्तन भवन तालाब की मरी हजारों मछलियों की दुर्गंध स्थानीय लोगों की भारी मुसीबत बन गया था। मछलियां मरने के दो दिन गुजर जाने के बाद भी मरी मछलियों को तालाब से बाहर नहीं निकालने से इसकी बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो गया था। इस तालाब से पानी की निकासी नहीं होने से तालाब का पानी काला पड़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि तालाब का पानी काफी दूषित हो जाने से गर्मी के मौसम में मछलियां मरती है।



