भारत

महिला आरक्षण बिल नहीं, चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश: राहुल 

नई दिल्ली- 17 अप्रैल। लोकसभा में संसद की तीन दिवसीय विशेष बैठक के दूसरे दिन महिला आरक्षण तथा परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण से संबंधित नहीं है, बल्कि यह देश के चुनावी नक्शे को बदलने की सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है।

राहुल गांधी ने शुक्रवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा कि देश के सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय रही है और प्रत्येक व्यक्ति ने अपने जीवन में मां, बहन या अन्य महिला सदस्यों से बहुत कुछ सीखा है। यह विधेयक महिला आरक्षण का वास्तविक विधेयक नहीं है, क्योंकि महिला आरक्षण से संबंधित कानून वर्ष 2023 में ही पारित हो चुका है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यदि वह वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है तो पूर्व में पारित विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, विपक्ष उसका पूर्ण समर्थन करेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि वर्तमान विधेयक का वास्तविक उद्देश्य परिसीमन के माध्यम से देश के राजनीतिक संतुलन को बदलना है। सरकार जानबूझकर जातिगत जनगणना से बच रही है ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व न मिल सके। यह एक ऐसी रणनीति है जिसके माध्यम से वंचित वर्गों को सत्ता संरचना से दूर रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कॉरपोरेट क्षेत्र, न्यायपालिका, निजी स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा संस्थानों में दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग की भागीदारी बहुत कम है। सार्वजनिक क्षेत्र, जो पहले इन वर्गों को अवसर प्रदान करता था, उसे समाप्त कर निजी हाथों में सौंप दिया गया है। सरकार इन समुदायों को केवल नाम मात्र के लिए पहचान देती है, लेकिन उन्हें वास्तविक भागीदारी नहीं देती।

परिसीमन के मुद्दे पर राहुल गांधी ने विशेष रूप से दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इन क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को कम करने की दिशा में कार्य कर रही है, जो संघीय ढांचे के विपरीत है। विपक्ष किसी भी स्थिति में इसे स्वीकार नहीं करेगा और इस प्रयास को विफल किया जाएगा।

राहुल गांधी ने कहा कि यह एक सच्चाई है कि देश के इतिहास में अन्य पिछड़ा वर्ग, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं के साथ कठोर और अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया है और यह तथ्य सभी जानते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो प्रयास किया जा रहा है, वह जातिगत जनगणना को दरकिनार करने का है ताकि प्रतिनिधित्व का प्रश्न टाल दिया जाए। सरकार इस विषय को आगे बढ़ाने के बजाय उसे टालने का प्रयास कर रही है, जिससे आने वाले वर्षों तक इन वर्गों को उनका अधिकार नहीं मिल सके।

राहुल गांधी ने कहा कि सत्ता संरचना में वंचित वर्गों की भागीदारी लगातार कम की जा रही है और यह एक गंभीर विषय है। कॉरपोरेट जगत, न्यायपालिका और अन्य प्रमुख संस्थानों में इन वर्गों की उपस्थिति नगण्य है और इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है। सरकार इन वर्गों को केवल पहचान के स्तर पर स्वीकार करती है, लेकिन उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं करती। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बदलने की आवश्यकता है और इसके लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। विपक्ष इस विधेयक का विरोध करेगा और इसे पारित नहीं होने देगा। यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर लाया गया है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य कुछ और है, जिसे देश के सामने लाना जरूरी है।

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