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सामूहिक बलात्कार में शामिल महिला को दोषी ठहराया जा सकता है: हाईकोर्ट

प्रयागराज- 13 फरवरी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सामूहिक बलात्कार में महिला अगर शामिल है तो उसे भी दोषी ठहराया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि वैसे तो कोई महिला बलात्कार का अपराध नहीं कर सकती है। लेकिन उसने लोगों के समूह के साथ मिलकर बलात्कार की घटना को अंजाम देने में सहयोग दिया तो संशोधित प्रावधानों के अनुसार उस सामूहिक बलात्कार का मुकदमा चलाया जा सकता है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के थाना बांसी में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर राहत देने से इंकार कर दिया और कहा कि मामले में हस्तक्षेप की जरूरत नहींं है।

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने सुनीता पांडेय की याचिका को खारिज करत हुए दिया है। याची की ओर से कहा गया कि वह महिला है। वह किसी भी महिला का बलात्कार नहीं कर सकती है। उसे फर्जी फंसाया गया है। मामले में याची का नाम पीड़िता के सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के बयान के तहत आया था।

निचली अदालत ने उसे ट्रायल फेस करने का आदेश दिया। याची ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने विचार करते हुए कहा कि अगर कोई महिला सामूहिक रूप से बलात्कार में शामिल है तो उसके खिलाफ भी मुकदमा चल सकता है और उसे दंड दिया जा सकता है।

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