बिहार

बिहार के राजकोषीय घाटा सीमा को जीएसडीपी का चार प्रतिशत किया जाए: विजय चौधरी

पटना/नई दिल्ली- 25 नवम्बर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेश की वित्तीय वर्ष 2023-24 के केन्द्रीय बजट के पूर्व विचार-विमर्श के लिए आयोजित बैठक में बिहार के वित्त विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य की राजकोषीय घाटा सीमा को राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का चार प्रतिशत किया जाय।

वित्त मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं में बिहार को विशेष सहायता के रूप में केन्द्रांश-राज्यांश का शेयरिंग पार्टनर 90:10 किया जाय। आधारभूत संरचनाओं के विकास एवं परिसंपत्तियों के सृजन पर व्यय के लिए बिहार स्पेशल प्लान (द्वितीय चरण) के रूप में 20 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किया जाय। वित्त मंत्री ने केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या को नीति आयोग के निर्णय के अनुसार 30 तक ही सीमित रखने के साथ इससे अधिक की योजनाओं में व्यय की जाने वाली राशि भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वहन करने की बात कही।

विजय चौधरी ने कहा कि सिंगल नोडल एकाउंट में 40 दिन के अंदर राज्यांश जमा करने की शर्त को समाप्त किया जाना चाहिए। सेस और सरचार्ज को केन्द्रीय विभाज्य पूल में शामिल किया जाना चाहिए ताकि इससे सभी राज्य लाभान्वित हो सकें। इन सुझावों को आगामी केन्द्रीय बजट में सम्मिलित करने के लिए अनुरोध भी किया गया।

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में केंद्रीय वित्त मंत्री, को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) पथों के अनुरक्षण एवं रख-रखाव मद में भी केन्द्रांश की राशि राज्यों को उपलब्ध कराने की बात के साथ सुदूर पंचायतों, गांवों, हाट-बाजार को प्रखण्ड/अनुमण्डल एवं जिला से जोड़ने के लिए अतिरिक्त सुलभ संपर्क योजना के तहत राज्यों को निधि उपलब्ध कराई जाय।

वित्त मंत्री ने केंद्र से मांग करते हुए कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में वन नेशंन वन टेरिफ लागू किया जाय। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए नाबार्ड के आरआईएस फंड के तहत विद्युत वितरण कम्पनियों को ऋण उपलब्ध कराई जाय। समग्र शिक्षा के तहत भारत सरकार द्वारा शिक्षकों को वेतन मद में कटौती की गई राशि राज्यों को उपलब्ध कराई जाय। पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग के कक्षा 1-8 तक के छात्रों को भी प्रधानमंत्री यशस्वी योजना के तहत 50:50 के अनुपात में छात्रवृत्ति प्रदान किया जाय।

राज्य में स्वास्थ्य प्रक्षेत्र के विकास के लिए आगामी बजट में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराई जाय। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र की स्थापना दरभंगा में किया जाय। कोशी-मेची नदी जोड़ योजना को हाई पावर कमिटि की अनुशंसा के आलोक में क्रियान्वयन किया जाय।

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