
1984 सिख विरोधी हिंसा नरसंहार है, मानवता के विरुद्ध अपराध है- हरदीप पुरी, भाजपा ने हरि नगर में निकाला मौन मार्च
नई दिल्ली- 01 नवंबर। 1984 सिख विरोधी हिंसा को नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराध बताया जाना चाहिए। 42 साल बाद भी सिख समुदाय उस त्रासदी को भुला नहीं पाया है। ये बात केंद्रीय मंत्री सरदार हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को हरि नगर में आयोजित मार्च के दौरान कही। भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को दिल्ली के हरि नगर में 1984 के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। मार्च का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, मंत्री आशीष सूद, वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का, सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी, सरदार अरविंदर सिंह लवली, विधायक श्याम शर्मा और बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग शामिल हुए।
हरदीप पुरी ने क्या कहा-
पुरी ने कहा कि 1984 में दिल्ली में 2,733 और देशभर में करीब 3,325 लोगों की हत्या हुई थी। ये सरकारी आंकड़े हैं, जबकि सिख समाज इन्हें अधूरा मानता है। उस समय हमलावर मतदाता सूची देखकर नहीं, बल्कि पहले से दी गई जानकारी के आधार पर सिख परिवारों के घरों तक पहुंच रहे थे, इससे साफ है कि हिंसा सुनियोजित थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पीड़ितों के दर्द को स्वीकार कर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। ऐसी हिंसा दोबारा देश-दुनिया में कहीं नहीं होनी चाहिए।
रेखा गुप्ता ने कहा- क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं थी?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आज संविधान की प्रति लेकर चलने वालों से सिख समाज पूछ रहा है कि नवंबर 1984 में जो हुआ क्या वह लोकतंत्र की हत्या नहीं थी? हजारों परिवारों ने अपनों को खोया। कांग्रेस और गांधी परिवार इसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
हर्ष मल्होत्रा बोले- SIT से मिला न्याय
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने इसे कांग्रेस की सुनियोजित साजिश बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी SIT से कुछ दोषियों को सजा मिली है, यशपाल को मृत्युदंड और नरेश शेरावत को आजीवन कारावास हुआ। दिल्ली सरकार ने पीड़ित परिवारों के करीब 250 सदस्यों को नौकरी दी है और अब तीसरी पीढ़ी को भी रोजगार देने का निर्णय लिया है।
सिरसा का राहुल गांधी पर निशाना
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि कांग्रेस आज न्याय की बात कर रही है, जबकि 1984 के आरोपों से घिरे नेताओं – सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर, एचकेएल भगत और धर्मदास शास्त्री को बड़े पद दिए गए।
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने कहा कि 1984 में सेवानिवृत्त और 51 सेवारत सैनिकों की हत्या हुई, सिखों के घरों की सूचियां पहले से तैयार थीं। सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि उनके परिवार ने भी अपनों को खोया है और पुनर्वास कॉलोनियों में रह रहे गरीब परिवारों को पूरी सहायता मिलनी चाहिए। आशीष सूद और अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि सिखों पर हमला देश की एकता पर हमला था। विधायक श्याम शर्मा ने कहा कि भाजपा ने मौन मार्च से श्रद्धांजलि दी है। भाजपा नेताओं ने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे गुरुद्वारा बंगला साहिब में बने 1984 स्मारक तक दीप मार्च निकालकर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।



