
जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण संशोधित अधिनियम 2026 एक अक्टूबर से लागू, 1 साल से ज्यादा लेट केस में अब DM/SDM और 2 साल से ज्यादा में कोर्ट का आदेश अनिवार्य
पटना- 14 अक्टूबर। बिहार में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा संशोधन किया है, जो 01 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो गया है। इस संबंध में विभाग ने संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर सभी एसडीएम,अस्पताल अधीक्षक, बीडीओ, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और पंचायत सचिव सह रजिस्ट्रार को अनुपालन का निर्देश दिया है। बिहार सरकार के निदेशक-सह-मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) डॉ. नुरुल हक सिवानी के पत्र के आलोक में जारी किया गया है। मुख्य रजिस्ट्रार ने भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली के पत्र का हवाला दिया है।
क्या है नया कानून?
भारत के राजपत्र में 06 अगस्त 2026 को The Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 (No. 12 of 2026) प्रकाशित हुआ था। गृह मंत्रालय के महारजिस्ट्रार कार्यालय ने 16 सितंबर 2026 को अधिसूचना संख्या S.O. 5081(E) जारी कर इसे 01 अक्टूबर 2026 से लागू कर दिया है, इस अधिनियम की धारा 13 में संशोधन किया गया है।
1.धारा 13(3) के अनुसार– अगर किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के 1 साल बाद लेकिन 2 साल के अंदर दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन सिर्फ जिला दंडाधिकारी (DM) या अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) या DM द्वारा अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी के आदेश पर ही होगा।
2. धारा 13(3A) के अनुसार– अगर सूचना 2 साल से ज्यादा लेट दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (Judicial Magistrate First Class) के आदेश पर ही होगा।
आम लोगों पर क्या असर?
अब तक 1 साल तक के केस में जिला रजिस्ट्रार (DSO) की अनुमति से काम चल जाता था, लेकिन नए संशोधन के बाद व्यवस्था साफ हो गई है कि 21 दिन के अंदर-पंचायत सचिव सह रजिस्ट्रार के पास सीधे। 21 से 30 दिन-विलंब शुल्क के साथ वहीं, 30 दिन से 1 साल-जिला रजिस्ट्रार की अनुमति+शपथ पत्र के साथ पंचायत में ही, 1 से 2 साल-DM / SDM का ऑर्डर, 2 साल से ज्यादा-कोर्ट का ऑर्डर जरूरी होगा। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस अधिसूचना के अनुसार जन्म-मृत्यु निबंधीकरण का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।



