
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: शिक्षकों की प्रमुख मांगें क्या हैं? मिथलांचल संघर्ष समिति अध्यक्ष इं. गौरीशंकर यादव ने रखा पक्ष
मधुबनी – 14 अक्टूबर। दरभंगा शिक्षक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी हलचल के बीच शिक्षक मतदाताओं की समस्याओं को लेकर मिथलांचल संघर्ष समिति के अध्यक्ष इं. गौरीशंकर यादव ने विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ एक MLC चुनने का नहीं, बल्कि बिहार के शिक्षकों के सम्मान और भविष्य का चुनाव है।
इं. गौरीशंकर यादव ने कहा कि दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर क्षेत्र के शिक्षक मतदाता लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सदन में उनकी आवाज कमजोर पड़ी है।
उन्होंने कहा कि वित्त रहित, संविदा, नियोजित और विशेष शिक्षकों को अभी भी सातवें वेतनमान का पूर्ण लाभ नहीं मिल रहा है। पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करना शिक्षकों की सबसे बड़ी मांग है।
शिक्षकों का स्थानांतरण पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हो। महिला शिक्षिकाओं और दिव्यांग शिक्षकों के लिए सुरक्षित स्थानांतरण का विशेष प्रावधान हो।
इं. यादव ने कहा कि शिक्षकों से BLO, जनगणना, मध्याह्न भोजन का हिसाब-किताब जैसे गैर-शैक्षणिक कार्य लिए जा रहे हैं। शिक्षक चाहते हैं कि उन्हें सिर्फ पढ़ाने का काम दिया जाए।
LNMU से जुड़े कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली हैं, लैब-लाइब्रेरी की हालत खराब है। अतिथि शिक्षकों को नियमित किया जाए और 18 साल से लंबित लाइब्रेरियन बहाली पूरी की जाए।
समान काम के लिए समान वेतन लागू नहीं है। वेतन में भारी विसंगति है। राज्यकर्मी का दर्जा तो मिला, लेकिन सेवा शर्तें आज तक स्पष्ट नहीं हैं।
इं. यादव ने मांग की कि LNMU और शिक्षा विभाग के कार्य के लिए समस्तीपुर, बेगूसराय और मधुबनी में भी काउंटर या कार्यालय खोला जाए, ताकि शिक्षकों को छोटे-छोटे काम के लिए दरभंगा का चक्कर न लगाना पड़े।
विद्यालयों में शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं बढ़ रही हैं। शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए सख्त कानून और आचार संहिता बने।
इं. गौरीशंकर यादव ने कहा कि शिक्षक समाज का निर्माता है, लेकिन आज वह खुद अपनी लड़ाई लड़ रहा है। लिफाफे के दम पर चुनाव जीतने वाले लोग शिक्षकों का दर्द नहीं समझ सकते। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता इस बार उस व्यक्ति को चुनेंगे जो सड़क से लेकर सदन तक शिक्षकों की आवाज बन सके।



