
बिहार के विकास की दोहरी तस्वीर; शराबबंदी से स्कूल की बदहाली तक: विजय कुमार यादव
मधुबनी- 24 अगस्त। फुलपरास विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सह दुर्गा माता मंदिर सेवा ट्रस्ट रामनगर के संस्थापक अधक्ष विजय कुमार यादव ने कहा कि बिहार में एक तरफ सरकार ने पूर्ण शराबबंदी लागू कर समाज सुधार का संदेश दे चुकी है। वहीं, दूसरी ओर हमारे भविष्य यानी हमारे बच्चों के स्कूलों की स्थिति देखकर हैरानी होती है। शराबबंदी कारगर साबित हो तो अच्छी बात है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है स्कूलों को बंद होने से बचाया जाना।
बिहार के लगभग 70% सरकारी स्कूलों में बाथरूम तक नहीं—
उन्होंने कहा कि हालात यह है कि बिहार के लगभग 70% सरकारी स्कूलों में बाथरूम तक नहीं है। यह हमारी बेटियों के सम्मान का सवाल है। जहां शौचालय है भी, वहां पानी, दरवाजा की समस्या बनी है। ऐसे में बच्चियां शौचालय का उपयोग कैसे करेगी? यह बड़ा सवाल बना है। स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग, साफ-सुथरा शौचालय हो, जिसमें पानी और दरवाजा हो। बाथरूम के बिना स्कूल अधूरा है।
स्कूलों के पूरे कैंपस में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी होना चाहिए—
अनेकों स्कूलों में तो बाउंड्रीवाल तक नहीं है। कोई सुरक्षा गार्ड नहीं। खुले मैदान में स्कूल चल रहा है, जहां जानवर घूमते हैं, असामाजिक तत्व आते-जाते हैं। ऐसे में हम अपने बच्चों को कैसे सुरक्षित महसूस करा सकते हैं।स्कूल में बाउंड्री वॉल, दिन के लिए सुरक्षा गार्ड, रात के लिए नाइट गार्ड की नियुक्ति किया जाना चाहिए। पूरे कैंपस में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी होना चाहिए ताकि शिक्षण कार्य में पारदर्शिता बनी रहे।
मैथिली सिर्फ भाषा नहीं, यह मिथिला की आत्मा—
उन्होंने बिहार के हरेक सरकारी स्कूल में ये 7 बुनियादी व्यवस्थाएं तुरंत लागू करने की मांग करते हुए कहा कि हरेक स्कूल में विषयवार शिक्षक निश्चित रूप से उपलब्ध कराया जाए। गणित, साइंस, इंग्लिश और आधुनिक युग में कंप्यूटर का अलग शिक्षक अनिवार्य होना चाहिए। स्कूल में कंप्यूटर लैब और इंटरनेट की व्यवस्था होनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि मैथिली सिर्फ भाषा नहीं, यह मिथिला की आत्मा है। मातृभाषा नहीं पढ़ेंगे तो हमारी संस्कृति कैसे बचेगी। हरेक स्कूल में मैथिली विषय अनिवार्य रूप से पढ़ाई होना चाहिए।



