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BIHAR:- प्रसिद्ध कमला नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट,चीन अपनी साजिश का बना रहा शिकार

मधुबनी-16 दिसंबर। मिथिलांचल की गंगा के नाम से प्रसिद्ध कमला नदी को मिथिला का जीवन रेखा माना जाता है। नेपाल के चुरे क्षेत्र स्थित सिंधुली से निकलने वाली पवित्र कमला नदी नेपाल और उत्तर बिहार दोनों के लिए जीवन दायिनी मानी जाती है। मिथिलांचल में कमला नदी को गंगा के स्थान का दर्जा दिया गया है। कमला बचाओ अभियान के जुड़े वरिष्ठ पत्रकार ललित झा से राष्ट्रीय सहारा की खास बातचीत में उन्होंने कहा कि कमला को मिथिला का गंगा भी कहा जाता है। धार्मिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह नदी इस क्षेत्र के लिए काफी  महत्वपूर्ण और उपयोगी है। क्योंकि भारत और नेपाल दोनों देशों के लगभग 50 से 60 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होती है। बल्कि इसी के दम पर मिथिला को अन्न का भंडार भी कहा जाता है। बिहार के सिर्फ मधुबनी जिले में 44,960 हेक्टेयर भूमि में इससे सिंचाई होती है। श्री झा ने कहा कि अफसोस के साथ कहना पङ रहा है कि मिथिलांचल की संस्कृति, सभ्यता एवं अर्थव्यवस्था का पालन पोषण करने वाली हमारी मां तुल्य कमला नदी को चीन अपनी साजिश का शिकार बना लिया है। जिससे इसके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगी है। चीन की साजिश नेपाल के प्रदेश 2 की सरकार द्वारा जारी किये गये एक आधिकारिक पत्र से कमला में चीन के नापाक मंसूबों का पता चला है। उन्होंने कहा कि हिमालिनी को प्राप्त एक गोपनीय दस्तावेज के अनुसार प्रदेश 2 सरकार के उद्योग,पर्यटन तथा वन मंत्रालय द्वारा कमला नदी को चीन की निर्माण कम्पनी चाईना रेलवे टू इंजीनियरिंग ग्रुप कार्पोरेशन लिमिटेड को लीज पर दे दिया गया है। उद्योग पर्यटन तथा वन मंत्रालय द्वारा डिविजन वन कार्यालय लहान सिरहा निर्देशित करते हुए पत्र में आदेश दिया गया है कि सिरहा जिला के कर्जन्हा नगरपालिका वार्ड संख्या-01 स्थित ब्लॉक नंबर एक में नंद बाबा सामुदायिक वन क्षेत्र के विशाल भूखंड,जो कमला नदी का हिस्सा है। तथा पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है। उसे चीन की इस निर्माण कम्पनी को लीज पर दे दिया गया है। चीन की निर्माण कम्पनी एवं प्रदेश टू के उद्योग पर्यटन तथा वन मंत्रालय के बीच अपारदर्शी तरीके से हुई गुपचुप सहमति के अनुसार चीन की कम्पनी को कमला नदी में नदीजन्य पदार्थ का भंडारण,उत्त्खनन एवं अन्य प्रयोजन हेतु उपयोग करने की अनुमति प्रदान की गयी है। ललित झा ने बताया कि  नेपाल के पूर्व पश्चिम राजमार्ग फोरलेन परिवर्तित किया जा रहा है।

सप्तरी के कंचनपुर से लेकर सिरहा के कमला पुल तक,करीब 87 किमी सड़क खंड के निर्माण का जिम्मा चीन की इसी निर्माण कम्पनी को मिला है। इसी सड़क खंड के निर्माण के बहाने चीन कमला नदी में अवैध रूप से उतखनन कर इसे भंडारण केंद्र में तब्दील करना चाहता है। जानकारों की मानें तो इसी का सहारा लेकर चीन कमला में साजिश रच रहा है। चीन के इस गलत करतूत से पवित्र कमला नदी के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो कमला में उत्तखनन एवं भंडारण से इस पर बहुआयामी प्रभाव पड़ेगा। इसका जलस्तर से लेकर बहाव तक सब कुछ नाकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है। कमला नदी में की जा रही गलत छेड़छाड से जहां एक तरफ कर्जन्हा एवं आसपास के क्षेत्रों में भूमिगत जल का स्तर बहुत नीचे गिरेगा। तथा स्थानीय निवासियों के बीच पीने वाली पानी के लिए हाहाकार मचेगा। वहीं दूसरी ओर नदी का इकोसिस्टम भी खराब होगा। नदी में अवैध उत्त्खनन से चुरे का भयंकर विनाश होने की संभावना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि चुरे विनाश के कारण कमला जलाधार वाले क्षेत्रों में मरुभूमिकरन की रफ्तार पहले से ही काफी तेज है। अब चीन द्वारा होने वाले अंधाधुंध उत्खनन से मिथिला के क्षेत्रों में मरुभूमिकरन की रफ्तार और अधिक तीव्र होगी। जिस कारण अन्न का भंडार के नाम से मशहूर यह मिथिला क्षेत्र दाने दाने का मोहताज होगा।

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