
पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू, पं. ऋषिनाथ झा बोले- श्रद्धा से किया गया तर्पण ही पितरों तक पहुंचता
मधुबनी- 20 सितंबर। सनातन धर्म में पितरों को देवताओं के समान माना गया है। इस वर्ष पितृपक्ष का प्रारंभ 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से होगा। समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। यह जानकारी पं. ऋषिनाथ झा ने दी। पं. झा ने बताया कि पितृपक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन अमावस्या तक 16 दिनों तक चलता है। मान्यता है कि इन दिनों पितर पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं। अपने वंशजों से जल, अन्न की अपेक्षा रखते हैं।
पं. झा के अनुसार श्राद्ध हमेशा दक्षिण मुख होकर करना चाहिए। तांबे के लोटे में जल, काला तिल, गंगाजल, दूध मिलाकर तर्पण करें। श्राद्ध के दिन सात्विक भोजन बनाएं। सबसे पहले पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देव, चींटी) निकालें। जिस तिथि को पूर्वज की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि को उनका श्राद्ध करें। जिनकी तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को करें। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में नया काम, खरीदारी, मांगलिक कार्य वर्जित होता है। इस दौरान पितरों के नाम से किया गया दान, ब्राह्मण भोजन, अन्न-वस्त्र का दान करने से परिवार में सुख-शांति और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।



