
श्रीलंका में भारतीय ज्ञान परंपरा का डंका: वृष्टि विज्ञान और AI के समन्वय पर डॉ. राजनाथ झा को अंतरराष्ट्रीय ‘प्रोफेसर अवार्ड 2026’
कोलंबो- 12 सितंबर। श्रीलंका की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में भारतीय वैदिक विज्ञान ने वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिकता का परचम लहराया। अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष वैदिक फेडरेशन (IVAF, U.S.A.) के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में पटना स्थित ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. राजनाथ झा को उनके अभूतपूर्व शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय ‘प्रोफेसर अवार्ड 2026’से सम्मानित किया गया।
डॉ. झा ने सम्मेलन में “भारतीय ज्योतिष शास्त्र में वृष्टि विज्ञान और वर्तमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)” विषय पर अपना ऐतिहासिक शोध-पत्र प्रस्तुत किया। अपने शोध में उन्होंने प्राचीन भारतीय ऋषियों द्वारा प्रतिपादित खगोलीय गणनाओं, मेघ-गर्भ लक्षणों और वृष्टि-विज्ञान के गूढ़ सूत्रों का आधुनिक डेटा-एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ सफल समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ सिद्ध किया कि वैदिक खगोल विज्ञान और अत्याधुनिक कंप्यूटर विज़न व मशीन लर्निंग का संगम मौसम एवं पर्यावरण पूर्वानुमान के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।
शोध-पत्र को प्राचीन भारतीय ज्ञान संपदा और समकालीन तकनीक के बीच एक युगांतरकारी सेतु बताते हुए वैश्विक प्रतिनिधियों ने मुक्तकंठ से सराहा। पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक विज्ञान के समानांतर स्थापित करने का यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान न केवल बिहार, बल्कि संपूर्ण भारत के अकादमिक जगत के लिए गौरवमयी उपलब्धि है। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीलंका के प्रतिष्ठित पेराडेनिया विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. वेन. जम्बुगहपिटिये धम्मलोक ने की।
IVAF की चेयरमैन दिव्या पिल्लई, एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. मनीष पाण्डेय सहित विश्व के अनेक देशों के मूर्धन्य खगोलविदों और वैदिक शोधार्थियों ने परिचर्चा में भाग लिया।



