
विश्व पर्यावरण दिवस: सनातन धर्म में कई पेड़ों को साक्षात देवस्वरूप माना गया: शरत चंद्र मिश्रा/संजीव मिश्र
मधुबनी- 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस पर यज्ञ ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट और स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के संयुक्त तत्वावधान में शहर के वाटसन विद्यालय के सामने वैद्य राम लखन मिश्र के आवासीय परिसर में तुलसी सहित अन्य औषधीय पौधे लगाए गए। मौके पर यज्ञ ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट शरत चंद्र मिश्रा ने कहा कि आध्यात्म में पेड़-पौधों को ईश्वर का साक्षात स्वरूप और जीवनदायिनी ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना गया है। यह पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। मनुष्य को आंतरिक शांति, ध्यान और चेतना के विकास में भी मदद करते हैं। सनातन धर्म में कई पेड़ों को साक्षात देवस्वरूप माना गया है। पीपल में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास माना जाता है। इसी वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बरगद अमरता का प्रतीक और त्रिदेव का निवास माना जाता है। तुलसी को आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।
वहीं बिल्व पत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।केला को देवगुरु बृहस्पति का कारक मानकर भगवान विष्णु की पूजा में उपयोग किया जाता है। ऋषि-मुनि प्राचीन काल से ही शांत वनों और पेड़ों की छांव में ध्यान लगाते रहे हैं। पेड़ों के आसपास की शुद्ध हवा और प्राकृतिक कंपन मन को शांत करने में सहायक होती है। जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर शुद्ध ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिसे आध्यात्मिक भाषा में ‘प्राण शक्ति’ कहा जाता है। कुछ वृक्ष जैसे पीपल और नीम, आध्यात्मिक ऊर्जा के बहुत बड़े संवाहक माने जाते हैं। शास्त्रों में पौधरोपण का पुण्य हिंदू पुराणों में पेड़ लगाना सबसे बड़े पुण्य का कार्य माना गया है।
संजीव कुमार मिश्र ने कहा कि मत्स्य पुराण के अनुसार, एक पेड़ लगाना दस पुत्रों के समान पुण्यकारी है। भविष्य पुराण में पौधरोपण को संतानोत्पत्ति के समान दर्जा दिया गया है।विष्णुधर्मोत्तर और पद्म पुराण में पेड़ लगाने से यज्ञों और तीर्थों के समान फल की प्राप्ति होती है। पेड़ हमें जीवन जीना सिखाते हैं। जैसे एक वृक्ष हर मौसम (गर्मी, सर्दी, बारिश) को सहकर भी फल और छाया देता है, वैसे ही आध्यात्मिक साधक को भी विपरीत परिस्थितियों में स्थिर और परोपकारी रहना चाहिए। पेड़ का पतझड़ और वसंत, जीवन के चक्र (मृत्यु और पुनर्जन्म) को दर्शाते हैं।



