भारत

मानसून की रफ़्तार तेज, उत्तर और मध्य भारत को जल्द मिलेगी भीषण गर्मी से राहत

नई दिल्ली- 02 जून। देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे मध्य और उत्तर भारत में जल्द ही तापमान में गिरावट आने के आसार हैं। वहीं दिल्ली-एनसीआर में भी बुधवार को तेज हवाओं और गरज के साथ हल्की बारिश का अनुमान है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को तेज हवाओं और गरज के साथ हल्की वर्षा होने के आसार हैं। हवाओं की गति 20-30 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। यहां अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 37-39 डिग्री सेल्सियस और 26-28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने के आसार हैं। 4 जून को भी यही स्थिति रहने का अनुमान है। इस दिन 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती है, बाद में हवाओं की रफ्तार 60 किमी प्रति घंटा हो सकती है। यहां अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 37-39 डिग्री सेल्सियस और 27-29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। वहीं, 5 जून को सुबह से दोपहर से पहले के समय के बीच तेज हवाएं चलने और गरज के साथ हल्की वर्षा होने का अनुमान है। हवा की गति 40-50 किमी प्रति घंटा बढ़कर 60 किमी प्रति घंटा तक चल सकती है। फिर रात में भी हल्की बारिश होने के आसार हैं। इस दिन का अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 36-38 डिग्री सेल्सियस और 27-29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

आईएमडी के मुताबिक, अगले 48 घंटों के भीतर यानी 4 जून तक साल दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के कई हिस्सों में आगे बढ़ जाएगा। मौसम वैज्ञानिकों ने कई क्षेत्रों में मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई है। इनमें अरब सागर और द्वीप समूह (दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्से, साथ ही लक्षद्वीप द्वीप समूह), दक्षिण भारत (केरल के कुछ और हिस्से और तमिलनाडु के कई इलाके) और बंगाल की खाड़ी (दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के बचे हुए हिस्से) में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

अगले 6-7 दिनों के दौरान केरल में कुछ जगहों पर 7-20 सेमी भारी वर्षा होने के आसार हैं। इसके अलावा तमिलनाडु तथा कर्नाटक में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इस सप्ताह के कई दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत तथा दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर मध्य भारत तक, आसमान में चक्रवाती हवाओं के कई घेरे और कम दबाव की रेखाएं सक्रिय हैं। 3 जून से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में दस्तक देगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय चार से पांच चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र बने हुए हैं। इनमें दक्षिण भारत, पूर्वी भारत, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत शामिल है।

मौसम को प्रभावित करने वाली दो हवा की कम दबाव वाली लाइन इस समय देश के ऊपर से गुजर रही हैं, जिससे मौसम में अस्थिरता बनी हुई है। इनमें पहली लाइन पूर्वी मध्य प्रदेश से शुरू होकर विदर्भ, तेलंगाना और रायलसीमा के रास्ते उत्तर-पूर्वी तमिलनाडु तक जा रही है। दूसरी लाइन मध्य पाकिस्तान से शुरू होकर उत्तर-पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड होते हुए सीधे पश्चिम बंगाल के तट तक फैली हुई है।

पूर्वोत्तर भारत में अगले 5 दिनों के दौरान, 3-8 जून के दौरान अरुणाचल प्रदेश में, 5-8 जून के दौरान असम और मेघालय तेज हवाओं और गरज के साथ हल्की से भारी बारिश होने की संभावना है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में कई स्थानों पर अगले 6 दिनों के दौरान हल्की से मध्यम वर्षा और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा का अनुमान है। उत्तर-पश्चिमी भारत में हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 3-6 जून को तेज हवाओं और गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मध्य भारत के अलग-अलग स्थानों पर अगले पांच दिनों के दौरान और पश्चिमी भारत के अलग-अलग शहरों में 3-6 जून को तेज हवाओं और गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।

उल्लेखनीय है कि केरल और उसके आसपास के तटीय इलाकों में प्री-मानसून की बारिश पहले ही शुरू हो चुकी है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान लक्षद्वीप के कुछ स्थानों पर 12-20 सेमी तक, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और गुजरात क्षेत्र के कुछ स्थानों पर 7-11 सेमी तक भारी वर्षा दर्ज की गई। वहीं, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान और गुजरात क्षेत्र के कुछ स्थानों पर 70-95 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली। उत्तराखंड और मराठवाड़ा में हवा की गति 50-70 किमी प्रति घंटा तक ही रही। राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि हुई। पश्चिमी राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में धूल भरी आंधी चली।

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