
मुंबई में शुभ सीता फाउंडेशन के तत्वावधान में तीन दिवसीय मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ, साहित्यकारों ने कहा- मैथिली की चर्चा के बिना भारत वर्ष का इतिहास अधूरा
मुंबई- 03 अप्रैल। मुंबई में शुभ सीता फाउंडेशन के तत्वावधान में तीन दिवसीय मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ शुक्रवार को किया गया। फेस्टिवल में मैथिली स्वागत गान- ‘मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आएल..’ की स्वागत गान की सुमधुर प्रस्तुति मिथिला की मिट्टी और संस्कृति से सराबोर हो उठा। साहित्यकारों ने कहा कि मिथिला अपनी सभ्यता संस्कृति एवं विशिष्टता के लिए विश्व में अलग पहचान रखती है। मैथिली जैसी मृदुल भाषा का कोई जोड़ नहीं है। मैथिली की चर्चा के बिना भारत वर्ष का इतिहास अधूरा है।
फेस्टिवल में मैथिली साहित्य में एआई के प्रभाव के संदर्भ लेखन,अनुवाद और प्रकाशन विषय पर वक्ता प्रदीप बिहारी,कार्तिकेय मैथिल, मनीष ठाकुर,कुमार विक्रमादित्य,राजेंद्र झा,भास्करानंद झा ने काफी रोचक चर्चा की। अमूल्य सुझाव दिए। फेस्टिवल में मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल सहित देश दुनिया के 100 से अधिक मैथिली साहित्यकारों, बुद्धजीवियों, साहित्यकारों, कवियों, समाजसेवियों और मिथिला मैथिली के विकास के लिए सदैव कार्य करने वाले शामिल हो रहे हे। संयोजिका मनोरमा झा के संयोजक में फेस्टिवल में साहित्यकार विनोदानंद झा, कार्तिकेय मैथिल, अरविंद कुमार अक्कू, प्रो. विद्यानंद झा, प्रो. कमलानंद झा, तारानंद वियोगी, विभा रानी, विनोद कुमार झा सहित अन्य गणमान्य ने मैथिली भाषा का इतिहास उसकी गरिमा और इसके वर्तमान दशा-दिशा पर अपने विचार रखे गए।
फेस्टिवल में तीन दिनों तक मैथिली भाषा व साहित्य के विकास पर मंथन किया जाएगा। फेस्टिवल में अमित आनंद, किसलय कृष्ण, संजीव कश्यप, प्रवीण नारायण चौधरी, अक्षय आनंद, रेखा सिंह, कुणाल ठाकुर, दीपिका चन्द्रा सहित अन्य साहित्यकारों ने भाग ले रहे है। फेस्टिवल के प्रारंभ में दिवंगत मैथिली साहित्यकार के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।



