
फ्री गैस सिलेंडर लेने वालों में से 60 फीसदी लोग कोयला और लकड़ी पर निर्भर
मधुबनी- 19 मई। बीते पंाच सालों में महंगाई के बेतहाशा वृद्धि से आमलोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। इस बढ़ोत्तरी का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवार पर हुआ है। इन सालों में आमदनी तो नहीं बढ़ी जबकि खर्च लगभग दोगुणा हो गया है। घर चलाने के साथ ही अन्य जरूरतों की पूर्ति अब मुश्किल हो गया है। सामान्य जरूरतों को पूरा करने में हर परिवार को औसतन दस हजार का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। कई खर्चो में अब लोगों को कटौती करनी पड़ रही है। शौक पर तो जैसे आफत ही आ गयी है।
गैर सरकारी जॉब में लगे लोगों के परिवार, छोटे और मध्यम स्तर के स्वरोजगार करने वाले लोगों के साथ ही श्रमिकों के सामने घर चलाना दिन प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। फ्री गैस सिलेंडर लेने वालों में से 60 फीसदी लोग कोयला और लकड़ी पर फिर से निर्भर हो चुका है। क्योंकि गैस की कीमत 450 से बढ़कर 11 सौ पार कर गया है। बिजली बिल के खर्च में घरेलु उपभोक्ताओं को लगभग पांच सौ का अधिभार झेलना पड़ रहा है। रसोई के सामानों के हिसाब से देखे तो ढ़ाई गुणा की वृद्धि हो गयी है। पेट्रोल और डीजल बढने से परिवहन सहित माल ढुलाई महंगा हो गया है। इसका असर हर सामानों की कीमत पर हुआ है। वहीं किसानों को खेती में अब दो गुणा का लागत बढ़ गया है।
कर्ज के गिरफ्त में ज्यातर परिवार—
घर चलाने के लिए अतिरिक्त 10 हजार जुटाना अब हर छोटे और मध्यम परिवार के लिए मुश्किल हो गया है। इसके लिए उसे कर्ज की गिरफ्त में फंसना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2016-17 की तुलना में देखे तो आमदनी यथावत है और खर्च दोगुणा हो गया है। कोरोना के बाद तो बाजार की हुई खराब स्थिति अभी संभल नहीं पाया है। इसकारण छोटे कारोबारी की आमदनी घट ही गयी है। व्यवसायी निर्मल राय ने बताया कि घर केे खर्च चलाने में काफी मुश्किल हो रही है। किसी माह बिजली बिल बकाया हो जाता है तो कभी गैस नहीं भरा पाते हैं। एटीएम से गुरुवार को पैसे निकाल रही शिक्षिका मीरा कुमारी ने बताया कि घर उनके वेतन पर ही चलता है। पति निजी स्कूल में काम कर रहे थे। काम छुट गया है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और ट्यूशन में भारी परेशानी हो रही है।
कोविड ने चौपट कर दिया—
सरकारी कर्मचारियों की आमदनी पर कोरोना का भले ही असर कमतर हुआ पर निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मियों की हालत काफी खराब है। मधुबनी जिले में कल कारखाना तो है नहीं। ऐसे में 80 फीसदी लोग निजी संस्थानों में जो काम कर रहे वे छोटे कारोबारी संस्थान से जुड़े हैं। जिनकी खुद की हालत खराब है। निजी स्कूल भी काफी संख्या में रोजगार दिया है। जिनकी हालत बदतर हो गयी है। इसका असर यह हुआ है कि इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोग बदहाल की स्थिति में आ गये हैं। रमेश मिश्रा और गोविन्द राम सेक्यूरिटी कंपनी में काम करते हैं बताया महंगाई तो घर की हर सिस्टम को बिगाड़ दिया है। बच्चे को प्राइवेट स्कूल से हटाना पड़ा है। ट्यूशन बंद कर दिया गया है। कॉपी एवं कलम का जुगाड़ ही अब घर चलाने के साथ मुश्किल होता जा रहा है।
आमदनी 8 हजार तो खर्च 18 हजार—
सब्जी के छोटा दुकान चलाने वाले अमरेन्द्र राय ने बताया कि आमदनी आठ हजार है, तो महंगाई के कारण खर्च 18 हजार के आंकड़े को पार कर गया है। पिछले साल एलआइसी का पैसा आया तो किसी तरह से परिवार चल पाया। अब काफी मुश्किल हो गया है। महंगाई के कारण जिस घर में पहले चार किलो सब्जी जाता था, वहां अब दो किलो जा रहा है। बाजार में हर छोटे दुकानदारों ने अपनी इसतरह की समस्याओं को गिनाया।
भाड़ा हो गया दोगुणा—
मधुबनी जिले के अंदर हो या फिर जिले से बाहर का सफर अब काफी कठिन हो गया है। अपने वाहनों पर लागत दोगुणा बढ़ गया है। वहीं किराया अब दोगुणा बढ़ गया है। मधुबनी से जयनगर, या लौकहा जाना हो या फिर पटना हर रूट का किराया देागुणा हो गया है। अमरेन्द्र कुमार और सीतेश ठाकुर ने बताया कि वे अक्सर सफर में रहते हैं। इस कारण अब खर्च अब तीन गुणा बढ़ गया है।
5 साल पहले का प्रतिमाह खर्च और अब—
मद——-पहले—–अब
दुध व दवा—7000—–9000
राशन खर्च—9000—14000
पेट्रॉल—-1500——2800
साफ सफाई—800—1200
स्कूल फीस—4000—8000
अन्य खर्च—2000—-4500



