भारत

तीसरी सूची में शामिल 100 रक्षा हथियारों के आयात पर प्रतिबंध लगेगा, 2025 तक होंगे स्वदेशी

नई दिल्ली- 06 अप्रैल। भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को तीसरी सूची जारी करेंगे। इस सूची में 100 से अधिक आइटम (हथियार) शामिल होंगे। इन्हें स्वदेश में ही विकसित किया जा रहा है। इन रक्षा वस्तुओं या उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगेगा और इन्हें केवल भारतीय फर्मों से ही खरीदा जा सकेगा। तीसरी सूची में शामिल आइटम को दिसंबर, 2025 तक पूरी तरह से स्वदेशी बनाया जाना है। इससे पहले 2020 से अब तक दो सूचियां जारी करके 209 हथियारों के आयात पर प्रतिबन्ध लगाया जा चुका है।

स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए 101 हथियारों और प्लेटफार्मों की ‘पहली सकारात्मक स्वदेशीकरण’ सूची 21 अगस्त, 2020 में अधिसूचित की गई थी। टैंक इंजन, रडार, कोरवेट सहित 108 हथियारों और प्लेटफार्मों की दूसरी सूची 31 मई, 2021 को जारी की गई थी। दोनों सूची में उल्लखित 209 प्रमुख उपकरणों, हथियारों और प्लेटफार्मों को तीसरी सूची में शामिल किया गया है, जिन्हें दिसंबर, 2025 तक पूरी तरह से स्वदेशी बनाया जाना है। पहली सूची में मुख्य रूप से 155 एमएम और 52 कैलीबर के अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) एमके-1ए के लिए उन्नत स्वदेशी सामग्री, पारंपरिक पनडुब्बी और संचार उपग्रह जीसैट-7सी शामिल हैं।

दूसरी सूची में अगली पीढ़ी के कार्वेट, भूमि आधारित एमआरएसएएम हथियार प्रणाली, स्मार्ट एंटी-फील्ड वेपन सिस्टम (एसएएडब्ल्यू) एमके-आई, टैंक टी-72, ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम (ओबीओजीएस) आधारित लड़ाकू विमानों के लिए एकीकृत जीवन समर्थन प्रणाली और 1000 हार्स पावर इंजन शामिल हैं। तीसरी सूची में जटिल उपकरण और प्रणालियों सहित 100 से अधिक आइटम शामिल होंगे, जिन्हें स्वदेश में ही विकसित किया जा रहा है। तीसरी सूची में शामिल वस्तुओं के अगले पांच वर्षों में भारतीय रक्षा उद्योग को 2,10,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिलने की संभावना है। इस अधिसूचना में जटिल हथियार प्रणालियों से लेकर बख्तरबंद वाहनों, लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों आदि जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफार्मों के 300 से अधिक विकसित उपकरणों को कवर किया जाएगा।

‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन

पहली और दूसरी सूची की अधिसूचना जारी होने के बाद से सशस्त्र बलों ने 53,839 करोड़ रुपये की 31 परियोजनाओं के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा 1,77,258 करोड़ रुपये की 83 परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) दी गई है। अगले पांच-सात वर्षों में 2,93,741 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। तीसरी सूची की अधिसूचना रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक प्रमुख पहल है और घरेलू उद्योग में सरकार के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है कि वे सशस्त्र बलों की मांग को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के उपकरण बनाकर आपूर्ति भी कर सकते हैं। ‘आत्मनिर्भर भारत’ का उद्देश्य अन्य देशों से आयात पर भरोसा किए बिना भारत को रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए घरेलू उद्योग का निर्माण करना है जो घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मांग को भी पूरा कर सके।

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