
नवरात्र विशेष: माता दुर्गा को महिलाओं द्वारा भरी जाने वाली ‘खोईछा’ भरने की परंपरा बड़ा फलदायी: मोद नारायण झा
मधुबनी- 10 अक्टूबर। नवरात्र में सुहागिन महिलाओं द्वारा माता दुर्गा को खोईछा भरने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे सुहाग और संतान की मंगलकामना का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। मां रुक्मिणी वृद्धाश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष मोद नारायण झा ने इस परंपरा के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्री झा ने बताया कि ‘खोईछा’ शब्द मिथिला की संस्कृति का प्राण है। खोईछा का अर्थ है – आंचल में समेटना। जब एक महिला अपने आंचल को फैलाकर उसमें माता से अन्न-धन और सुहाग मांगती है, तो उसे खोईछा भरना कहते हैं।
क्या होता है खोईछा में?
श्री झा के अनुसार, शास्त्रों में खोईछा के लिए 5 चीजों का होना अनिवार्य होता है।
1. अक्षत (चावल): यह अन्न और पूर्णता का प्रतीक है। माता को चावल चढ़ाने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
2. सिंदूर: यह सुहाग का प्रतीक है। माता को सिंदूर अर्पित करने से पति की आयु लंबी होती है।
3. पान-सुपारी और सिक्का: यह लक्ष्मी और स्थिरता का प्रतीक है।
4. हल्दी की गांठ: यह गुरु ग्रह को मजबूत करती है। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाती है।
5. दूर्वा और फूल: यह संतान सुख और पवित्रता का प्रतीक है।
कब भरी जाती है खोईछा?
पं. झा ने बताया कि नवरात्र में महा सप्तमी, महा अष्टमी और महा नवमी के दिन खोईछा भरने का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं माता के सामने अपना आंचल फैलाती हैं। पंडित जी मंत्रोच्चार के साथ उनके आंचल में खोईछा डालते हैं। मान्यता है कि जो महिला नवरात्र में सच्चे मन से माता दुर्गा को खोईछा भरती है, उसकी तीन मनोकामना जरूर पूरी होती है।
पहली- अखंड सुहाग की प्राप्ति,
दूसरी- संतान की दीर्घायु और सुख, तीसरी – घर में धन-धान्य की वृद्धि।
ज्योतिषीय महत्व—
मोद नारायण झा ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में खोईछा को शुक्र और चंद्रमा को मजबूत करने वाला उपाय माना गया है। शुक्र सुहाग और समृद्धि का कारक है, जबकि चंद्रमा मन और मातृत्व का। नवरात्र में देवी को खोईछा देने से कुंडली में वैवाहिक दोष, मांगलिक दोष भी शांत होते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक मां का दूसरी मां से अपने परिवार की रक्षा के लिए किया गया आग्रह है। माता दुर्गा स्वयं जगत जननी हैं, इसलिए जब महिलाएं उनसे खोईछा भरवाती हैं तो माता उन्हें अन्नपूर्णा होने का आशीर्वाद देती हैं।



