
RAJASTHAN:- सरकारी स्कूलों में अब सादा चपाती की जगह मिलेगी हरी सब्जियों से तैयार चपाती
जयपुर- 10 अप्रैल। राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील में अब सादा चपाती के स्थान पर हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, बथुआ और मैथी, धनियां मिलाकर मसालों के साथ तैयार चपाती दी जाएगी। साथ ही, सप्ताह में एक दिन मौसमी फल भी दिया जाएगा। खासतौर पर गर्मी में केला तो सर्दी में अमरूद का स्वाद विद्यार्थियों को चखने को मिलेगा। मिड डे मील आयुक्तालय की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा के मुताबिक मिड डे मील में हरी पत्तेदार सब्जियों का उपयोग अधिक से अधिक करना होगा। खाद्यान्न, मसाले, दाल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर और साफ करने के बाद ही काम में लेने को कहा गया है। स्कूली बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्ता पूर्ण भोजन मिल सके, इसके लिए फोर्टीफाइड आटा, दाल, तेल और नमक का उपयोग करना होगा। बच्चों को दी जाने वाली चपाती अच्छी तरह से पकी हुई होना जरूरी होगी। उसे अधिक पौष्टिक बनाने के लिए उसमें हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, बथुआ और मैथी, धनियां मिलाकर मसालों के साथ तैयार करनी होगी। दाल, सब्जी या खिचड़ी प्रेशर कुकर में बनानी होगी, जिससे उनकी पौष्टिकता बनी रह सकें।
स्कूलों में वितरित होने वाले भोजन और खाद्यान्न की समय समय पर जांच खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रयोगशालाओं में करवाना भी जरूरी होगी, जिससे भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा सके। पिछले दिनों आयुक्तालय के पास मिड डे मील को लेकर कई प्रकार की शिकायतें आई हैं जिसमें पाया गया था कि कई संस्थानों में मिड डे मील वितरण में खाद्यान्न की पौष्टिकता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इतना ही नहीं पिछले दिनों दौसा जिले के नांगलराजावतान उपखंड के एक स्कूल में पोषाहार से तकरीबन 22 बच्चों की तबीयत भी बिगड़ गई थी।
आयुक्तालय ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने परिसर में किचन गार्डन तैयार करें जिसमें पत्तेदार सब्जियाें के साथ नींबू, मिर्च, टमाटर आदि उगाए जा सकें और उनका उपयोग मिड डे मील तैयार करने में लिया जा सकेगा। आयुक्तालय ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए हैं कि मिड डे मील का वितरण करने से पहले दो बड़े व्यक्ति अनिवार्य रूप से भोजन को चखेंगे। इसके बाद ही उसे बच्चों को वितरित किया जाएगा। साथ ही विभागीय अधिकारियोंं को नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग करनी होगी। यदि अधिकारी इसका निरीक्षण नहीं करते तो उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।



