बिहार

NOU में आयोजित ज्योतिबा फुले की जयंती पर वक्ताओं ने कहा- शिक्षा से ही हर समस्याओं का समाधान संभव

पटना- 11 अप्रैल। नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के तत्वावधान में बिस्कोमन टावर स्थित हॉल में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती सोमवार को एच डी एफ सी बैंक लिमिटेड के सौजन्य से मनाई गई। सबसे पहले उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर केसी सिन्हा और संचालन कुलसचिव डॉ. घनश्याम राय ने की। कुलपति ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि ज्योतिबा फुले को उन्नीसवीं सदी का एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता माना जाता है। उन्होंने भारतीय समाज में फैली कई बुराइयों को दूर करने के लिए संघर्ष किया। अछूतों के कल्याण,महिला शिक्षा,विधवा- विवाह और किसानों के कल्याण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। रजिस्ट्रार डॉ घनश्याम राय ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि ज्योतिबा फुले का जन्म नीची जाति में हुआ था। उन्हें शिक्षा से वंचित कर दिया गया था, फिर भी उन्होंने वंचित समाज को शिक्षित करने के लिए कई स्कूलों को खोला। ‘दलित’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम ज्योतिबा फुले ने किया था। उन्होंने अनेकों पुस्तकें लिखी हैं, जो क्रमशः गुलामगिरी,तीसरा रत्न,छत्रपति शिवाजी,राजा भोसला का पाखड़ा, ब्राह्मणों का चातुर्य और किसान का कोड़ा आदि है,जो अभी भी हाशिए पर हैं, उन्हें अन्याय और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने सत्य शोधक समाज नाम की संस्था की स्थापना की। तथा दलितों और लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कूल खोले,छुआछूत का विरोध किया। ज्योतिबा फुले और उनके संगठन के कारण कृषि अधिनियम पारित करने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर पीके पोद्दार ने कहा कि अरबी फारसी विद्वान गफ्फार बेग मुंशी और फादर लिजित साहब ज्योतिबा फुले के पड़ोसी थे। जब उन्हें अछूत होने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था। लेकिन पढ़ने की उनकी जिज्ञासा को देखते हुए,उन्हें फिर से स्कूल में भर्ती कराया गया। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षित किया और भारत की पहली शिक्षिका बनने का अवसर प्रदान किया। उनकी समाज सेवा को देखते हुए 1888 में मुंबई में एक विशाल सभा में ‘महात्मा’ की उपाधि दी गई। उन्होंने विस्तार से उनके जीवन दर्शन को बताया। प्रोफेसर नीरज कुमार,सीसीडीसी, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय,आरा ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने दलितों को न्याय दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। मौके पर एएन कॉलेज,पटना के राजनीति विज्ञान के वरीय प्राध्यापक प्रोफेसर संजय कुमार,स्वतंत्र लेखक डॉ कृष्ण कुमार झा,एनओयू के कुलसचिव(परीक्षा) डॉ नीलम कुमारी,वित्त पदाधिकारी रामशीष प्रसाद,आईटी समन्वयक डॉ अमरनाथ पांडेय,सहायक प्राध्यापक क्रमशः डॉ किरण पांडेय,डॉ संगीता,डॉ पल्लवी,डॉ मीना,डॉ अमरेश रंजन,शिक्षकेत्तर कर्मी क्रमशः मुकेश कुमार,संजय कुमार,शंकर कुमार मिश्रा,जीतेश कुमार, राकेश कुमार,आलोक कुमार,राजकुमार,उमेश प्रसाद,अमर कुमार,पप्पू तिवारी,अंजनी कुमार,गुड्डू,मनोज कुमार,अक्षय कुमार,शुभम, राजीव आदि उपस्थित थे। वहीं कुलसचिव डॉ घनश्याम राय ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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