
MADHUBANI: विवाह के मौसम में ट्रेंड कर रहा मिथिला पेंटिंग्स में राधा-कृष्ण, सीता स्वयंवर वाली साड़ी, दुपट्टा, कुर्ती
मधुबनी – 7 मई। फैशन समय के साथ बदलता रहा है। महिलाएं फैशन को लेकर अधिक सजग रही हैं। लग्न के इस मौसम में मधुबनी की मिथिला पेंटिंग वाले राधा-कृष्ण, सीता स्वयंवर वाली सिल्क व कॉटन साड़ी, दुपट्टे, कुर्ती फैशन की दुनिया में काफी ट्रेंड कर रहा है। वहीं, पाग, दोपटा और पेंटिंग की भारी मांग है। आज के फैशन की दुनिया में मिथिला पेंटिंग वाले परिधानों का कोई मुकाबला नहीं। महिलाएं इसे काफी पसंद कर रही हैं। साड़ियाें, ब्लाउज, दुपट्टों व कुर्तियों आदि पर मिथिला पेंटिंग का चलन लोकप्रिय होता जा रहा है। इनकी मांग इतनी बढ़ चुकी है कि कलाकारों के पास ऑर्डर की लंबी फेहरिस्त है। देश ही नहीं, विदेशों में भी इसके कद्रदान हैं।

कलाकारों ने मधुबनी की पारंपरिक कला को पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया है। जी-20 और अन्य मंचों के माध्यम से इन पेंटिंग्स की ब्रांडिंग होने से विदेशों से भी आर्डर आ रहे हैं। पेंटिंग का ऑनलाइन कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। सालाना लगभग 10 करोड़ रुपये का हो गया है। कोरोना काल के बाद से फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल मंचों के माध्यम से पेंटिंग, साड़ियों और अन्य हस्तशिल्प की ऑनलाइन बिक्री में भारी उछाल आया है। महानगरों में लगने वाले हाट व प्रदर्शनी में यह परिधान विदेशियों को खूब लुभाते हैं। महिलाओं की यह पसंद कलाकारों को आत्मनिर्भर बना रही है। बता दें कि मूल रूप से दीवारों पर होने वाली मधुबनी की चित्रकारी कपड़ों पर धूम मचा रही है। कलाकारों को इससे आर्थिक संबल भी मिला है। मिथिला की यह पारंपरिक कला आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है। जिले के राजनगर प्रखंड के बेल्हवार गांव की मिथिला पेंटिंग्स कलाकार मीनाक्षी झा ने बताया कि घर बैठे ऑनलाइन मंच minakshijha911 के जरिए अपनी कला को विश्व स्तर पर बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।कलाकृतियों से 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह आमदमी कर लेते है। इस कार्य में पति पंकज कुमार झा का काफी सहयोग मिलता है। यह कला मिथिला की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। है। यह कला मिथिला की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।



