
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध विधेयक पर हस्ताक्षर किए, भारत-चीन पर 100% टैरिफ का रास्ता खुला
वॉशिंगटन – 19 सितंबर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ (H.R. 5334) पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार यह कानून रूस पर वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और निषेधों का दायरा बढ़ाता है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों को 5 साल के लिए बढ़ाता है।
मुख्य प्रावधान:
इस कानून से राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने के तय मानदंडों को पूरा करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का अधिकार मिलता है। यह शुल्क स्वतः नहीं लगेगा, बल्कि टॉप 5 बड़े खरीदारों पर लगाया जा सकेगा। उन देशों पर भी जो प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।
यह विधेयक अगस्त में सीनेट में 86-11 के बड़े अंतर से और इसी सप्ताह प्रतिनिधि सभा में 262-159 मतों से पारित हुआ था। विधेयक का नाम इसके प्रमुख समर्थक रहे दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है।
कानून रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, रक्षा नेटवर्क और तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ -यानी प्रतिबंधों को चकमा देकर ऊर्जा ढोने वाले जहाजों पर कार्रवाई का दायरा भी बढ़ाता है। कानून हस्ताक्षर के 30 दिन बाद प्रभावी होगा। राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में छूट देने का अधिकार भी देता है।
भारत और चीन पर असर:
इस कानून का सीधा असर भारत और चीन जैसे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर पड़ सकता है। हालांकि भारत पहले ही कह चुका है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुसार राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखेगा। जहां से सही कीमत पर तेल मिलेगा, खरीद जारी रखेगा। वहीं, चीन ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समर्थन के बिना लगे एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है।



