भारत

सरदार पटेल की बदौलत ही एक सशक्त व एकीकृत ‘एक भारत’ की नींव रखी गयी: उपराष्ट्रपति

हैदराबाद- 17 सितंबर। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार काे कहा कि स्वतंत्रता के बाद देशी रियासतों के भारत संघ में विलय में देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने असाधारण जिम्मेदारी निभाई और एक सशक्त व एकीकृत ‘एक भारत’ की नींव रखी। सरदार पटेल के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही ‘एक भारत’ हमेशा के लिए ‘एक भारत’ रहेगा।

यह बात उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आज यहां सिकंदराबाद स्थित परेड ग्राउंड में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ समारोह को संबोधित करते हुए कही। यह कार्यक्रम 17 सितंबर 1948 को तत्कालीन हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में औपचारिक विलय की याद में आयोजित किया गया था।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हैदराबाद का विलय उस दौर की सबसे कठिन और जटिल चुनौतियों में से एक था। जब कूटनीतिक वार्ताएं विफल हो गईं, तब भारत सरकार ने 13 सितंबर 1948 को ‘ऑपरेशन पोलो’ शुरू किया, जो 17 सितंबर 1948 को निजाम की सेना के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ।

उन्होंने हैदराबाद मुक्ति को स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक निर्णायक अध्याय करार दिया और इस संघर्ष में साहस व बलिदान देने वाले सभी देशभक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हाेंने जोर देकर कहा कि सरदार पटेल जानते थे कि जिस समय नव-स्वतंत्र राष्ट्र की नींव रखी जा रही हो, उस समय भारत किसी भी प्रकार के राजनीतिक बिखराव को सहन नहीं कर सकता।

समारोह की शुरुआत में उपराष्ट्रपति ने वॉर मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने परेड का निरीक्षण कर मार्च पास्ट की सलामी ली और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगाई गई विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

इस मौके पर एक हजार तेलंगाना के लोग कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर समारोह को जीवंत और रंगीन बना दिया।

कार्यक्रम में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन रामचन्द्र राव भी उपस्थित रहे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में तेलंगाना की जनता को बधाई देते हुए एक कड़ा संदेश दिया-

“तेलंगाना की जनता हैदराबाद को भारतीय संघ से अलग रखने और इसे पाकिस्तान की ओर मोड़ने की निज़ाम व रज़ाकारों की कोशिशों तथा उनके आतंक के दौर को कभी नहीं भूलेगी। तेलंगाना के लोग यह भली-भांति देख रहे हैं कि किस तरह चालाक और छद्म-धर्मनिरपेक्ष दल हमारे स्वतंत्रता सेनानियों, अमर नायकों और उनके महान बलिदानों का सम्मान करने में विफल रहे हैं। वह दिन ज़रूर आएगा जब जनता इन्हें करारा सबक सिखाएगी।”

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