
उर्दू ज़ुबान मोहब्बत और मिठास की भाषा: उपमुख्यमंत्री
पटना- 30 अगस्त। उर्दू अदब और जुबान की बेहतरी,नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने और मुशायरों के माध्यम से गंगा-जमुनी तहजीब को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जश्न-ए-उर्दू का आयोजन होता रहा है। बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्थानीय श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित दो दिवसीय शानदार जश्न-ए-उर्दू कार्यक्रम का कल देर शाम उद्घाटन किया। इस मौके पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उर्दू ज़ुबान मोहब्बत और मिठास की भाषा है और जश्न-ए-उर्दू का आयोजन बिहार में गंगा-जमुनी तहजीब की बेहतरी की मिसाल है। बिहार में जश्न-ए-उर्दू की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने की। समय के साथ यह आयोजन उर्दू भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
उपमुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा कि बिहार की पहचान सदियों से विविध भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बीच समन्वय तथा सामाजिक सौहार्द की रही है। जश्न-ए-उर्दू जैसे आयोजन इस गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और समाज में प्रेम, भाईचारे एवं सद्भाव की भावना को और प्रगाढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जी के साथ काम करने का एक लंबा वक़्त बीता है। उनके कामों एवं समझदारी को मैंने करीब से देखा है। उर्दू एवं अकलियत हेतु जो कार्य उन्होंने किये, वह पूरे मुल्क में मिसाल है। 2005 से लगातार 20 वर्षों तक बिहार में मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने के दौरान लोगों को विश्वास में लेकर काम करना उनकी पहचान रही। उन्होंने कहा कि हुकूमत में रहते हुए उनके कार्य देश में मिसाल बने एवं छोड़ने के वक़्त वे बेमिसाल बन गए। आने वाली सियासी नस्लें नीतीश कुमार की उपलब्धियों पर रश्क करेंगी। मुझे खुशी है कि नीतीश कुमार के वसूलों पर चलते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार उर्दू की तरक्की एवं अकलियत की समृद्धि एवं सुरक्षा हेतु संकल्पित है।
उन्होंने जश्न-ए-उर्दू के शानदार आयोजन हेतु मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं उर्दू निदेशालय के निदेशक को धन्यवाद देते हुए कहा कि अकलियत और उर्दू भाषा कैसे आगे बढ़े, इसके लिए सरकार द्वारा लगातार कोशिश की जा रही है। उर्दू निदेशालय का अस्तित्व सिर्फ बिहार में होना उर्दू भाषा और साहित्य की तरक्की के प्रति सरकार की संजीदगी को दर्शाता है।
उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि उर्दू भाषा की कशिश एवं मिठास ऐसी है, जो सिर्फ बोलने भर से ज़ुबान मीठी हो जाती है। आजादी के दौरान ‘इन्कलाब जिंदाबाद’ जैसे सैकड़ों नारे उर्दू में गढ़े गये, जो इसकी मकबूलियत के प्रतीक हैं, दिल को छूते हैं।
गौरतलब है कि जश्न-ए-उर्दू का दो दिवसीय कार्यक्रम 29 एवं 30 अगस्त को पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कुल हिंद मुशायरा, बिहार में उर्दू तालीम एवं तदरीस, उर्दू ड्रामा, सुप्रसिद्ध क्लासिकी ग़ज़ल गायिका विदुषी भारती विश्वनाथन द्वारा शाम-ए- ग़ज़ल की प्रस्तुति रही। इस मौक़े पर कई जाने-माने उर्दू के साहित्यकार एवं शायरों ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी।
मौक़े पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो० जमा खान,बिहार विधान परिषद् के सदस्य मो० अफाक अहमद खान, बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मो० इरशादुल्लाह, बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मो० इरशाद अली आजाद, उर्दू परामर्शदातृ समिति के अध्यक्ष मो० नौशाद आलम, बिहार विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री आमिर सुबहानी, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविन्द कुमार चौधरी,उर्दू निदेशालय के निदेशक एस.एम.परवेज आलम,दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर इर्तिजा करीम,जश्न-ए-बहार ट्रस्ट की संस्थापक श्रीमती कामना प्रसाद सहित अन्य गणमान्य लोग एवं भारी संख्या में उर्दू प्रेमी श्रोता उपस्थित थे।



