
हस्तरेखा और वास्तु के संगम से बदल रही लोगों की किस्मत, वर्तमान दौर में बढ़ी मांग : महिमा कुमारी
मधुबनी – 30 अगस्त। वर्तमान समय में जब लोग मानसिक तनाव, पारिवारिक अशांति और कारोबार में उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं, ऐसे में प्राचीन भारतीय विद्या वास्तुशास्त्र और हस्तरेखा विज्ञान एक बार फिर लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है। वास्तु आचार्य व हस्तरेखा विशेषज्ञ महिमा कुमारी बताती हैं कि वर्तमान परिवेश में पितृपक्ष और शारदीय नवरात्रि से पहले घर और प्रतिष्ठान में वास्तु सुधार का विशेष महत्व होता है। आजकल फ्लैट कल्चर और गलत दिशा में बने निर्माण के कारण नकारात्मक ऊर्जा बढ़ रही है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य और समृद्धि पर पड़ता है। वास्तु तोड़-फोड़ नहीं, बल्कि ऊर्जा का संतुलन है। छोटा सा परिवर्तन भी बड़ा परिणाम देता है। उन्होंने कहा कि हस्तरेखा केवल भविष्य नहीं बतातीं, बल्कि हाथों की रेखाओं, ग्रहों की स्थिति और वास्तु दोषों को जोड़कर व्यक्ति को सही निर्णय लेने में मदद करती हैं। बता दें कि वास्तु जैसा पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान माना जाने वाला क्षेत्र में महिमा कुमारी ने अपनी अलग पहचान बनाई है। वे कहती हैं कि महिला में सहज ही सकारात्मक ऊर्जा को पहचानने की शक्ति होती है। वास्तु और हस्तरेखा में महिलाओं का योगदान ज्यादा प्रभावी होता है।



